October 28, 2020

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magnetic field और neuro magnetic signals की भूमिका और नामकरण का जीवन पर प्रभाव


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मुकेश सिंह चौधरी (Russia)

जीवन की सफलता और समस्याओं में हमारे व बच्चों के magnetic field और neuro magnetic signals की भूमिका और नामकरण

जैसे हम सभी जानते हैं कि मानव जीवन एक ईश्वर की दी हुई एक अमूल्य देन है जिसको हर कोई इंसान सुखी तरीके से बिताना चाहता है तथा इस छोटे से जीवन में हर शख्स एक शख्सियत बनना चाहता है जिसके लिए वह दिन रात एक करता है जैसे-जैसे मानव प्रजाति और तकनीक का विकास हुआ हम भौतिकवादी होते चले गए और आज के इस भौतिक युग में हर शख्स अपने नाम पहचान और पैसे को शख्सियत के तौर पर देखता है इसीलिए अपने अरमानों को पूरा करने हेतु अपने बच्चों के लिए सब कुछ दाव पर लगा देते हैं तथा उन्हें महंगे स्कूलों में पढ़ाई लिखाई और व्यापार आदि में निवेश करते हैं लेकिन फिर भी अमूमन देखा जाता है कि कोई भी अपने जीवन से संतुष्ट नहीं हैं जिसका कारण शारीरिक मानसिक परिवारिक व आर्थिक तंगी जैसी अकारण समस्याएं जीवन में आना है। ईश्वर ने यह जीवन अच्छे कर्म करने हेतु दिया है जिससे हम सुख में तरीके से अपना जीवन यापन कर सके लेकिन इस पूरे जीवन में सुख की घड़ी शायद ही नसीब हो क्योंकि तरह-तरह की अकारण समस्याओं ने इतना घेर लिया की हम तनाव में रहने हैं और इससे मानसिक दुर्बलता, शारिरीक कमजोरी और आर्थिक व परिवारीक हानि भी होती हैं। 1 दिन में हमारे दिमाग में लगभग 70000 विचार आते हैं और हम उन्हीं में से अपने दिमाग की क्षमता के अनुसार सोच समझ गए निर्णय लेकर अपना काम करते हैं दिमाग एक कंप्यूटर की तरह है जिस में सोचने समझने वह निर्णय लेने की क्षमता कोडिंग प्लेट पर निर्भर करती है जिसका नियंत्रण ऊर्जावान प्रतिरक्षा प्रणाली पर निर्भर करता है अगर वह संतुलित है तो आप के सोचने समझने में निर्णय लेने की क्षमता सही रास्ते पर होगी और अगर वह संतुलित है तो वायरस के तौर पर सोचने समझने में निर्णय लेने की क्षमता सही रास्ते पर नहीं होगी इसके बाद सोचने समझने व निर्णय लेने से हमारे दिमाग में न्यूरो मैग्नेटिक सिगनल्स उस लक्ष्य के प्रति अपना काम करना शुरू करते हैं जिससे एनर्जेटिक मैग्नेटिक फील्ड क्रिएट होता है और उस एनर्जी टिक मैग्नेटिक फील्ड के क्रिएट होने से हमें अपने लक्ष्य की प्राप्ति होती है हमारे निर्णय लेने और लक्ष्य की प्राप्ति के बीच में जो स्पेस है उसकी समय सीमा हमारी ऊर्जा पर निर्भर करती है अगर हमने बड़ा लक्ष्य लिया है तो उसके प्रति जो न्यूरो मैग्नेटिक सिग्नल डिवेलप हुए हैं उनको एनर्जेटिक मैग्नेटिक फील्ड क्रिएट करने में समय लगता है और उचित समय पर हमें परिणाम मिलता है इसमें सबसे महत्वपूर्ण रोल हमारी ऊर्जावान प्रतिरक्षा प्रणाली का होता है क्योंकि अगर वह संतुलित है तभी हम सही सोच समझ कर निर्णय लेने में सक्षम होते हैं वरना ब्रह्मांड की वेव्स को कंप्रेस कर सोचने समझने व निर्णय लेते समय कन्फ्यूजन की स्थिति पैदा होती है और उस कंफ्यूजन की स्थिति में जो न्यूरो मैग्नेटिक सिग्नल लक्ष्य के प्रति जाते हैं उनमें डिस्टरबेंस पैदा होता है जिससे मैग्नेटिक फील्ड कमजोर रह जाता है और कन्फ्यूजन की स्थिति के चलते व्यक्ति लक्ष्य हासिल न कर पाने के कारण नर्वस हो जाता है। जिन लोगों का नाम जन्म तारीख की श्रेणी के अनुसार नाम की श्रेणी होती है वह कंफ्यूज नहीं होते और अपने लक्ष्य को हासिल कर लेते हैं क्योंकि उनके सोचने समझने में निर्णय लेने की क्षमता ऊर्जावान प्रतिरक्षा प्रणाली के संतुलित होने के कारण सही होती है जिससे उनके न्यूरो मैग्नेटिक सिगनल्स एक प्रॉपर्ली ऊर्जावान मैग्नेटिक फील्ड को विकसित करते हैं जिससे उन्हें लक्ष्य की प्राप्ति होती है। इसीलिए आप भी अपने जीवन में इसीलिए इंसान के जीवन में सबसे पहला महत्वपूर्ण काम उसकी जन्म तारीख की श्रेणी का ज्ञात होना तथा उसके अनुसार नाम कर कर ऊर्जावान प्रतिरक्षा प्रणाली को संतुलित करना है जिससे भविष्य में दर दर की ठोकरें न खानी हो, अकारण परेशानियां न आए और अपने लक्ष्य की प्राप्ति आसानी से कर सके। अधिक जानकारी के लिए हिन्दी पेज https://m.facebook.com/uniquerahasyalogy पर विजिट करें।