October 31, 2020

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महाराष्ट्र में सत्ता के लिए हॉर्स ट्रेडिंग की प्रबल संभावना ने लिया जन्म


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महाराष्ट्र में रातों-रात  जिस प्रकार से  मुख्यमंत्री  पद  और सरकार गठन  की प्रक्रिया हुई उससे महाराष्ट्र  संवैधानिक पद पर बैठे व्यक्तियों पर बड़े सवाल उठना लाजमी है।

ठीक है कि आज राजनीति का स्तर अपने निम्न स्तर पर है लोकतांत्रिक मर्यादाओं का पूर्णतया हनन हो रहा है मगर आज आप  ईडी  या सीबीआई  की रिवाल्वर को कनपटी पर लगा कर सत्ता सुख भोग रहे हैं तो कल जब हवा का रुख बदलेगा तो यही ईडी और सीबीआई की रिवाल्वर आपकी भी कनपटी पर होगी।

यह सच है की जनता का बड़ा समर्थन आज भाजपा के साथ है मगर जनता को मूर्ख समझने की गलती कांग्रेस की तरह भाजपा को भी भारी पड़ेगी ही आज आम आदमी के मन में तमाम सवाल उठ रहे हैं क्या भाजपा के शीर्ष नेतृत्व के पास इन सवालों का जवाब है।

1. गवर्नर ने राष्ट्रपति शासन हटाने की रिपोर्ट कब भेजी ?
2. राष्ट्रपति ने रिपोर्ट को स्वीकार कर कब प्रधानमंत्री को भेजा ?
3. कैबिनेट मीटिंग के निर्देश और सूचना कब जारी हुए ?
4. कैबिनेट मीटिंग कब हुई, कौन कौन शामिल हुए ?
5. कैबिनेट की अनुशंसा राष्ट्रपति के पास कब गयी ?
6. राष्ट्रपति ने कितने बजे निर्णय लिया और अधिसूचना जारी हुई ?
7. रात भर गवर्नर, राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, कैबिनेट सदस्य, कैबिनेट सचिव-इन सबके कार्यालय, कैबिनेट सचिवालय/ विधि मंत्रालय के शीर्ष ऑफ़िसर जागे रहे। क्या ये संवैधानिक इमर्जेन्सी थी ?
8. राष्ट्रपति शासन हटाने का निर्णय कब गवर्नर को मिला?
9. शपथ का निमंत्रण देवेंद्र फड़नवीस और अजित पवार को कब मिला, कितनी देर में वो राज्यपाल भवन पहुँचे ?
10. क्या वो पूर्व जानकारी के आधार पर सुबह सुबह तैयार थे ? ये पूर्व जानकारी किस से उन्हें मिली थी ?

यह सच है कि सत्ता मोह मैं शिवसेना धोबी का कुत्ता बन कर रह गई, यह भी सच है कि शिवसेना ने जन भावना भावना का अनादर किया, क्योंकि जनता ने वोट शिवसेना या भाजपा को नहीं दिया बल्कि गठबंधन को दिया था। और चुनाव पूर्व हुए गठबंधन धर्म की मर्यादा और सम्मान दोनों ही दल नहीं रख सके, राजनीति के निचले स्तर पर जाकर धुर विरोधियों के एक होने का भारतीय राजनीति में कोई पहला मामला नहीं है, मगर उन गठबंधनों का क्या अंजाम होता रहा है यह पब्लिक ने भली-भांति देखा और समझा है।

पूर्व में बालासाहेब ठाकरे की मृत्यु के उपरांत सत्ता के लोभ में महाराष्ट्र ने दो भाइयों के बीच के झगड़े का दर्द झेला और भोगा है, जहां राज ठाकरे ने अपनी राजनीति चमकाने के लिए पूरे महाराष्ट्र महाराष्ट्रीयन बनाम बाहरी के झगड़े में झोंक दिया था उन्हीं राज ठाकरे को महाराष्ट्र की जनता ने कितना वोट दिया जय लोकसभा और विधानसभा के चुनावों में सभी ने देखा है उद्धव ठाकरे ने अपने बेटे के लिए महाराष्ट्र को किस प्रकार से 12 राय पर लाकर खड़ा कर दिया यह भी जनता ने भली भांति देखा है।

कट्टर हिंदुत्व की झंडा बरदार शिवसेना अपने मूल्यों को छोड़कर किस प्रकार जिन लोगों के खिलाफ चुनाव लड़ी सत्ता के लिए उन्हीं के साथ जा मिली यह भी लोगों ने देखा भाजपा ने भी किस प्रकार धुर विरोधी से सत्ता के लिए हाथ मिला लिया ये भी सभी ने देखा।

ताजा घटनाक्रम को देखा जाए तो महाराष्ट्र में हॉर्स ट्रेडिंग की प्रबल संभावना ने जन्म ले लिया है क्योंकि ताजा अपडेट के अनुसार 49 विधायक शरद पवार के साथ हैं तो फिर भाजपा आखिर कैसे बहुमत साबित करेंगी भाजपा विरोधी सभी दल मिलकर सुप्रीम कोर्ट पहुंच गए हैं जहां आज इस मामले पर सुनवाई होनी है

बीबीसी लाइव न्यूज़ के लिए संपादकीय राकेश गुप्ता