October 20, 2020

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सेक्स अभिलाषा का किस्मत कनेक्शन से संबंध और ऊर्जावान प्रतिरक्षा प्रणाली की भूमिका


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मुकेश सिंह चौधरी (Russia)

सेक्स संबंधो का सम्पति यानी आर्थिक सम्पन्नता से संबंध का खेल और उर्जावान प्रतिरक्षा प्रणाली की इसमें भूमिका
सेक्स के बारे में सुनते या सोचने ही लड्डू फटने लगते हैं और हाँ , फुटे भी क्यों न? हर कोई इसके बारे में जानने का इच्छुक होता हैं। सेक्स इंसानी जीवन को हर स्तर पर बहुत अधिक प्रभावित करता है फिर चाहे वह मानसिक, शारीरिक, आर्थिक या परिवारिक ही क्यों ना हो। इसका संबंध ऊर्जात्मक स्तर से हमारे जीवन के हर क्षेत्र से जुड़ा हुआ है। मेरी एक थ्योरी के अनुसार “sex is basement of success” और हमारे जीवन में आने वाले उतार-चढ़ाव में इसकी भी महत्वपूर्ण भूमिका होती है।
सेक्स अफेयर के बारे में हर कोई जानता है और काफी लोग भुगतभौगी भी है इसके। इसमें कोई शक नहीं की सेक्स आनन्द देता है क्योंकि सही और सिस्टमाटिक सेक्स से दिमाग को तृप्ति मिलती हैं। खैर अब मुख्य टापिक पर आते हैं। सेक्स का हमारे जीवन में आर्थिक स्तर पर भी बहुत अधिक प्रभाव होता है सेक्स (sex- successful energy exchange) उर्जाओं के आदान प्रदान की प्रक्रिया है। व्यक्ति अपने आप में उर्जाओं का एक पुंज हैं, उर्जाओं के आदान-प्रदान से ही हमारा यह जीवन चलता है। जिसमें सेक्स के माध्यम से सबसे ज्यादा ऊर्जा का आदान-प्रदान होता है और इसका प्रभाव हमारे जीवन पर भी पड़ता है।
सेक्स अफेयर होना एक आम सी बात हो गया है। हर व्यक्ति में अलग-अलग ऊर्जा का स्तर होता है और जब दो पार्टनर आपस में संभोग करते हैं और उन में से अधिकतर में अलग-अलग उर्जाएं होती है यानी एक में अधिक और एक में कम सकारात्मक ऊर्जा तो जिसमें अपनी ऊर्जा से कम ऊर्जा वाले के साथ संबंध बनते हैं तो जीवन के हर स्तर में उतार आना शुरू हो जाता है और अगर अधिक ऊर्जा वाले से संबंध बनते हैं उसके जीवन में सुधार आना शुरू हो जाता है। प्रकृति ने स्त्री और पुरुष को बहुत सोच समझकर बनाया है। स्त्री एक सॉफ्टवेयर की तरह है और पुरुष हार्डवेयर की तरह। अगर इसका उदाहरण देखना हो तो हम देखते हैं कि जब दो लोगों की आपस में शादी होती है तो शादी के बाद परिवार में उतार या चढ़ावा आना निश्चित है। कई परिवारों में शादी के बाद तरक्की होती है, नौकरी वगैरह भी लग जाती हैं। तो कुछ परिवारों में शादी के बाद आर्थिक स्तर नीचा होने लगता है। इसका मतलब यह नहीं कि वह गलत है जबकि इसके पीछे कई कारण हैं। काफी लोगों के मैरिटल अफेयर भी होते हैं जिसकी उन्हें आदत होती है और पुरुष समाज की एक ऐसी सोच है कि जब भी वह बाहर किसी से संभोग करके घर आता है तो अपनी स्त्री से संभोग जरूर करता है क्योंकि उसके मन में यह झिझक होती हैं की कही पता ना चल जाए। लेकिन इसके सबसे ज्यादा साइड इफेक्ट हैं और इसका खामियाजा वह पुरुष ही नहीं जबकि उसका परिवार भी भुगतता है।
सेक्स कोई खेल या हंसी मजाक नहीं जबकि मानव जीवन की सबसे महत्वपूर्ण और उर्जाओं के आदान-प्रदान की प्रक्रिया है। इसमें कभी भी क्रोस सेक्स नहीं करना चाहिए जिन लोगों को अफेयर्स की आदत लग जाती है उन से आसानी से यह आदत नहीं छूटती। लेकिन कम से कम यह ध्यान रखना चाहिए की 72 घंटों तक क्रोस सेक्स ना करें क्योंकि एक बार किये हुए सेक्स अफेयर द्वारा हुए उर्जाओं के आदान-प्रदान को वापिस सामान्य होने में 72 घंटे तक का समय लगता है। काफी लोगों को देखा जाता है कि वह अपने टेंपरेरी फास्टनर से सेक्स के बाद उनका आर्थिक स्तर कम होने होना शुरू हो जाता है जिसका कारण यह नहीं कि वह मेहनत नहीं करते या मेहनत कम करने लगे हैं जबकि इसका कारण नकारात्मक ऊर्जा का आना होता है क्योंकि जिस पार्टनर के साथ संभोग किया उनकी ऊर्जा का स्तर खुद की अपेक्षा कम था।
आज की युवा पीढ़ी इस तकनीकी विकास के युग में विशेष तौर पर मोबाइल क्रांति के बाद तो उनके लिए सेक्स अफेयर बहुत आसान हो गया है। जिसके चलते संबंध बनाने में आसानी रहती है लेकिन इसके दुष्परिणाम भी भूगतते हैं क्योंकि अगर देखा जाए तो वर्तमान में पहले की बजाए स्ट्रेस लेवल अधिक रहने लग गया है और अनेकों अकारण परेशानियां व्यक्ति को घेरे रहती है। जिसमें सबसे ज्यादा मानसिक आर्थिक और शारीरिक व परिवारीक परेशानियां आती हैं।
ये अकारण संबंध बनाने से नहीं बनते और ना ही सेक्स अफेयर की लत छुटती हैं। इसका कारण उर्जावान प्रतिरक्षा प्रणाली का असंतुलित होना होता है। जब यह असन्तुलित होती हैं तो बराबर उर्जा वाले से संबंध ना बनकर दुसरो से ज्यादा बनते हैं। सेक्स एक कला ही नहीं जबकि एक विज्ञान भी है। इसके असन्तुलन से सोच और विचार सही से काम न करने के कारण नकारात्मक उर्जा के सेक्स पार्टनर जीवन में आते हैं और इसकी लत लगती हैं। बहुत लोगों के जीवन में आर्थिक स्तर अच्छा होने पर देखा गया है कि सेक्स अफेयर बढ़ने के बाद गिरावट आई है। कुछ मामलों में परिवार भी टूट जाते हैं।
आज के इस प्रगतिशील समय में माता पिता अपने बच्चो के प्रति इस मामले को लेकर काफी चिंतित रहते हैं इसलिए उर्जावान प्रतिरक्षा प्रणाली के आधार पर जन्म तारीख की श्रेणी के अनुसार नाम रखने से इससे बचाव रहता है क्योंकि सोचने विचारने व समझने की क्षमता इससे संतुलित रहती हैं। अकारण समस्याओं और लोगों से भी बचाव रहता है। आज के समय में महगे स्कूल, फोन, गाडी, घर से जरूरी ऊर्जावान प्रतिरक्षा प्रणाली के आधार पर नाम का होना बेहद जरूरी है। आप अधिक जानकारी के लिए हिन्दी पेज https://m.facebook.com/uniquerahasyalogy पर विजिट करे।