October 24, 2020

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अयोध्या मामले को लेकर मुस्लिम पर्सनल ला बोर्ड के पुनर्विचार को लेकर अखिल भारतीय मुस्लिम महासंघ ने अपनी प्रतिक्रिया दी


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अयोध्या मामले को लेकर मुस्लिम पर्सनल ला बोर्ड के पुनर्विचार को लेकर अखिल भारतीय मुस्लिम महासंघ ने अपनी प्रतिक्रिया दी

जहां एक और राम जन्मभूमि अयोध्या मामले को देखते हुए सर्वोच्च न्यायालय का फैसला आया है वही मुस्लिम पर्सनल ला बोर्ड की एक पुनर्विचार के बारे में जो मीटिंग चल रही है उसको लेकर आज अखिल भारतीय मुस्लिम महासंघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष फरहत अली खा ने मुस्लिम पर्सनल ला बोर्ड के बयान की निंदा करते हुए कहा और वही ओवैसी के बयान का भी पलटवार किया और साथ ही उन्होंने कहा कि जो सर्वोच्च न्यायालय का अयोध्या को लेकर जो फैसला आया है उसको सभी धर्म के लोगों को मानना चाहिए और एक यह सर्वोच्च न्यायालय का बहुत ही अच्छा फैसला आया है और हम इसका सम्मान करते है

वही अखिल भारतीय मुस्लिम महासंघ के फरहत अली खा ने माननीय सर्वोच्च न्यायालय का जो फैसला आया है उसका पूरे हिंदुस्तान नहीं बल्कि बर्रे सगीर जहां बहुत बड़ी मुस्लिम तादाद है खैर मकदम किया है स्वागत किया है वही हमारा मुस्लिम पर्सनल ला बोर्ड है हम उसको बहुत अहमियत देते हैं लेकिन उसको यह सोचने की जरूरत है इस वक्त में मुसलमान को तरक्की तालीम और तिजारत की जरूरत है इस वक्त एनआरसी का भी बहुत बड़ा मुद्दा है जिसको घर घर जाकर के लोगों को बताना है अपने डॉक्यूमेंट सही रखें जहां सर्वोच्च न्यायालय का फैसला अल्लाह की रजा को मानकर चलें और एक देशभक्ति की भावना अमन भाईचारे की भावना जगाते हुए उसको कबूल करते हुए हम लोगों को मस्जिद जिसकी जगह माननीय सर्वोच्च न्यायालय ने दी है वहां पर मस्जिद किस तरीके से बने कहां बने इसके ऊपर राय आंबा बनाना चाहिए

वही अखिल भारतीय मुस्लिम महासंघ के फरहत अली खा ने ओवैसी के सवाल पर कहा जो माननीय सर्वोच्च न्यायालय ने मस्जिद की जगह भेंट की है हम समझते हैं वहां के निर्माण में सरकार तो कोशिश करें करेगी लेकिन अखिल भारतीय मुस्लिम महासभा की तरफ से जो मेन गुंबद होगा उस मस्जिद का मैं कहूंगा तो उस मस्जिद को नाम दिया जाए तो उस मस्जिद का नाम भी मस्जिद ए नूर होना चाहिए या नूरी मस्जिद होना चाहिए वह अमन का चैन का भाईचारे का पैगाम फैलाए उसके गुंबद को चांदी का गुंबद मैं बनाने का प्रयास करूंगा और कोशिश करूंगा यह मेरे संगठन की तरफ से यह मेरा एलान है

अखिल भारतीय मुस्लिम महासंघ के फरहत अली खा ओवैसी के बयान पर पलटवार करते हुए कहा देखिए ऐसा है हिंदुस्तान नहीं जब से इसलाम पूरी दुनिया में फैलना शुरू हुआ और हिंदुस्तान की तरफ को भी फैलता हुआ आया तब से यहां के राजा महाराजाओं ने या जमीदारों ने अपनी जमीन हदिए के रूप में मस्जिद मदरसों या कोई भी चीज बनाने के लिए तो लाजमी सी बात है हदिए का चलन है चाहे शाहजहां ने हदिया दीया हो चाहे अकबर ने दिया हो तो सरकारे जो हैं हमेशा से हदिया देती चली आ रही है जो माननीय सर्वोच्च न्यायालय ने सरकार के माध्यम से 5 एकड़ जो जगह दी है मैं समझता हूं कि वह एक हदिया है और उसको मुसलमानों को कबूल करना चाहिए और ओवैसी और ओवैसी साहब जैसे लोगों को मैं यह सलाह देता हूं कि वह मस्जिद के बनाने में सहयोग करें ना की लोगों को भड़काने का काम करें कि हम खैरात नहीं लेते हैं हम जकात नहीं लेते हैं और खुद ही अपने आप एक जगह कह रहे हैं मैं आपके टीवी चैनल के माध्यम से बताना चाह रहा हूं कि मैं झोली फैला कर निकलूंगा तो पैसा ही पैसा इकट्ठा कर लूंगा तो लाजमी सी बात है झोली फैलाकर आप निकलेंगे तो अल्लाह के नाम पर ही मांगेंगे और यह माननीय सर्वोच्च न्यायालय ने जो जगह दी है हमें 5 एकड़ वह भी बफफुल अल्लाह मानी जाएगी वह भी अल्लाह के लिए है इसे सारे मुसलमानों को और ओवैसी साहब जैसे नेताओं को भी कबूल करना चाहिए