October 27, 2020

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खाद्य सुरक्षा और औषधि विभाग भोपाल के आयुक्त पर मनरेगा लोकपाल में जांच प्रकरण दर्ज


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खाद्य सुरक्षा और औषधि विभाग भोपाल के आयुक्त पर मनरेगा लोकपाल में जांच प्रकरण दर्ज

नागदा, 12 नवम्बर (हि.स.)। कैलाश सनोलिया । लोकपाल मनरेगा संभागीय सतर्कता समिति लोकायुक्त संगठन उज्जैन ने जिला पंचायत उज्जैन के पूर्व सीईओ व भारतीय प्रशासनिक सेवा अधिकारी रविंद्र सिंह के खिलाफ जांच प्रकरण दर्ज किया है। इस कार्यवाही में मनरेगा उज्जैन के पूर्व सहायक परियोजना अधिकारी नरेंद्र जोशी भी लोकपाल जांच के घेरे में है। आईएस रविद्रसिंह इन दिनों मप्र खाद्य सुरक्षा और औषधि विभाग भोपाल में आयुक्त के पद पर हैंं। कार्यवाही आरटीआई कार्यकर्ता कैलाश सनोलिया निवासी नागदा की एक शिकायत पर पंजीबद्ध हुई है। लोकपाल कार्यालय उज्जैन में यह प्रकरण क्रमांक 13/ 2019 पर दर्ज हुआ है।

आगे अब मनरेगा सभागीय सर्तकर्ता समिति लोकपाल करूणा एस त्रिवेदी ने शिकायत कर्ता सनोलिया को 13 नवम्‍बर को मनरेगा लोकपाल कार्यालय उज्जैन में उपस्थित होकर साक्ष्य प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैंं । निर्देश की प्रति सुरक्षित है।

यह है मामला –
शिकायत में बताया गया कि उज्जैन जिले में चल रही मनरेगा योजना की गतिविधियों की जांच के लिए उपलब्ध कराए गए 15 वाहनों का उपयोग अन्य कार्योंं में मनमाने तरीके से किया गया। यहां तक की इन वाहनों को अटैच करने के लिए टेंडर प्रकिया का उपयोग भी नहीं किया गया। शिकायत के मुताबिक उज्जैन की तत्कालीन कलेक्टर डॉ. एम. गीता ने जिला पंचायत के तत्कालीन मुख्य कार्यपालन अधिकारी रविन्‍द्र सिंह को दिनांक 10 अगस्त 2010 को पत्र क्रमांक 876 जारी कर यह निर्देश दिया था कि राज्य शासन द्धारा राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार योजना गारंटी स्कीम के कार्यो में अनियमितता की जांच हेतु तहसीलदारों/ नायब तहसीलदारों को अधिकृत किया जाता है।जिसके तहत उज्जैन जिले में जारी विभिन्न निर्माण कार्यो की जांच की जाना है।

जिले के सभी तहसीलदारों व नायबतहसीदारों को वाहन उपलब्ध कराने का भी आदेश दिया था। इस आदेश के परिपालन में अतिरिक्त जिला कार्यक्रम समन्वयक मप्र राज्य रोजगार गारंटी परिषद जिला पंचायत के तत्कारलीन अधिकारी रविन्‍द्र सिंह ने एक आदेश दिनांक 21 सितंबर 2010 को उज्जैन जिले के कुल 15 अपर तहसीलदारों एवं नायब तहसीलदारों के नाम एक निर्देश जारी किया था।इसमे बताया गया था कि मनरेगा योजना के तहत ग्राम पंचायतों में चल रहे कार्याेंं की अनियमितता की जांच के लिए वाहन उपलब्ध कराए जा रहे हैं। ग्राम पंजायत को जारी राशि , कार्य की भौतिक स्थिति एवं चेक लिस्ट भी इस आदेश के साथ संलग्र की गई थी। जांच प्रतिवेदन जिला पंयायत समन्वयक एवं कलेक्टर उज्जैन को प्रस्तुत करना था। उपलब्ध वाहनों की लाग बुक भी संधारित करने का आदेश था। लेकिन इन वाहनों का उपयोग मनरेगा योजना के तहत ग्रामीण अंचलों में भ्रमण ना करते हुए अन्य कार्यांं के लिए कर लिया गया। जिससे वितीय अनियमितता हुई। जिला पंचायत के सीईओ के आदेश में तो सात दिनों तक वाहनों एवं डीजल खर्च की अनुमति थी। कई अधिकारियों ने इन वाहनों का उपयोग 15 दिनों तक कर लिया गया ।

शिकायत में ये उठाए सवाल-
शिकायत ये सवाल उठाए गए हैंं कि मनरेगा योजना केंद्र एवं राज्य सरकार के सहयोग से संचालित है। इलाहाबाद हाईकोर्ट के निर्णय आने पर इन वाहनों का उपयोग अधिकारियों ने मनमानेे तरीके से कर लिया। जबकि ऐसा नहीं किया जाना चाहिए था । तत्कालीन एपीओ नरेंद्र जोशी ने बिना किसी टेंडर प्रकिया के वाहनों को लगाया । कई अधिकारियों ने इन गाडिय़ों के उपयोग का जो प्रतिेवेदन प्रस्तुत किए उसमें आला- अफसरोंं के निवास से कार्यालय तक लाने तथा वापस छोडऩे की जानकारी भी प्रस्तुत की है जोकि नियमानुसार सही नहींं है । सात दिनों के लिए वाहन उपलब्ध कराए गए थे जबकि कई अधिकारियों ने 15 दिनों तक कानून व्यवस्था बनाने की आड़ में इनका दुरूपयोग किया हैं

नागदा से संजय शर्मा की रिपोर्ट