October 28, 2020

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सच सड़क से संसद तक

तस्वीर के पीछे छुपा एक सच


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प्रयागराज।ये तस्वीर किस गांव की है मुझे नहीं पता और स्थान की यहां अहमियत भी नहीं है।बस ये सच्चाई है कि तस्वीर हमेशा सच बोलती है।कभी आप कूड़े बिनते बच्चे देखते होंगे और दूसरी तरफ आप को ऐसे बच्चे भी दिखते होंगे जो साफ ,उजले कपड़ों में रोज़ बैग और टिफिन के साथ स्कूल जाते होंगे। वहीं बड़े शहरों के ट्राफिक सिग्नलों पर कभी भीख मांगते या सामान बेचते बच्चे भी अपने देखें होंगे।हाल में सोशल मीडिया पर एक ऐसी बच्ची की तस्वीर भी वायरल देखी होगी जिसमें वह बच्ची दीपावली के दियों में बचा तेल बोतल में एकत्रित कर रही है।
कहने का ये मतलब कि हर तस्वीर के पीछे मन को उद्वेलित कर देने वाली असलियत जरूर है। लेकिन ये तस्वीर कुछ अलग है।इसको गौर से देखिए कितनी साफ-सुथरी तस्वीर है।हालात से मुकाबला और समय से कदमताल दोनों की इनमे चाहत है।अब गुल्ली डंडा इनको नहीं खेलना,हो कैरम की चाहत हो गरी।सोचा परिजन रोटी के जुगाड़ में रहते हैं तो कैरम कौन ला कर देगा।इन छोटे बच्चों ने खुद जमीन पर ही कैरम बोर्ड बनाने का फैसला कर लिया।जरा रचनात्मकता तो देखिए।कैरम की शक्ल बनाना अलग है और हुबहू कैरम बना देना,वह भी मिट्टी से अलग बात है।कैरम की गोटें अंदर जाने के लिए सलीके से बनाया गया छेद भी है। गोटें दुबारा केसे निकलें,इसके लिए हाथ जान की मुनासिब चौड़ाई भी की गई।इसमें रचनात्मकता और सुंदरता दोनों है।ये एक अलग प्रतिभा की भी गवाही दे रही है।यानी बाल्यकाल से ही अगर हम अपने नौनिहालों को एक सही दिशा दें तो वह निष्चित रूप से भविष्य में एक बेहतर परिणाम देंगे।देश और समाज के लिए ईमानदारी से काम आयेंगे।इनकी रचनात्मकता को मेरा सलाम।

शाहिद नकवी