October 20, 2020

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चतरा/इटखोरी- अक्षय नवमी के मौके पर महिलाएं ने की भक्ती भाव से आँवले वृक्ष पूजा अर्चना


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चतरा/इटखोरी- अक्षय नवमी के मौके पर महिलाएं ने की भक्ती भाव से आँवले वृक्ष पूजा अर्चना

इटखोरी । सुख समृद्धि की कामना के लिए महिलाओं ने किया आवाला पुजन। शास्‍त्रों के मुताबि‍क नवमी से लेकर पूर्णिमा तक भगवान विष्णु का आवंले के पेड़ पर वास रहता है। अक्षय नवमी का यह दि‍न इतना व‍िशेष होता है कि‍ कि‍सी भी कार्य की शुरुआत ब‍िना क‍िसी मुहुर्त देखे की जा सकती है। वहीं संतान प्राप्‍त‍ि के ल‍िए इस द‍िन आंवले के पेड़ की व‍िध‍िव‍िधान से पूजा व व्रत करना फलदायी होता है। इसके अलावा इस द‍िन आंवला व प्रसाद स्वरूप चखने से सभी दुख व रोग दूर होते हैं।  कार्तिक माह शुक्‍ल पक्ष की अक्षय नवमी को आमला नवमी भी कहते हैं। इस खास द‍िन पर आंवले के पेड़ की पूजा की जाती है। शास्‍त्रों के मुताबि‍क नवमी से लेकर पूर्णिमा तक भगवान विष्णु का आवंले के पेड़ पर वास रहता है। अक्षय नवमी का यह दि‍न इतना व‍िशेष होता अक्षय नवमी के अवसर पर भद्रकाली मंदिर परिसर में आंवला के वृक्ष की विशेष पूजा-अर्चना की गई तथा भगवान विष्णु से धन-धान्य की कामना की गई। अक्षय नवमी की पूजा में भारी संख्या में महिलाओं तथा युवतियों ने हिस्सा लिया। इस अवसर पर अक्षय नवमी का विशेष पाठ भी किया गया। अक्षय नवमी के पाठ का श्रवण करने केलिए बड़ी संख्या में महिला शामिल हुई।भद्रकाली मंदिर परिसर स्थित संग्रहालय के समीप समेत आंवले वृक्ष के पास पुरे प्रखंड में शहर के विभिन्न मोहल्लों के महिलाओं ने पूजा-अर्चना की। इस अवसर पर कुष्मांडा दान भी किया गया। इस दान की पुरानी परंपरा के तहत महिलाएं भुआ में द्रव्य छिपाकर ब्राह्मण को दान किया। आंवलावृक्ष के नीचे प्रसाद के रूप में खीर-पूरी, खिचड़ी पकाई गई। इस बाबत अक्षय नवमी का पाठ करते हुए आचार्य जनार्दन पांडेय ने बताया कि कार्तिक के नवमी को आंवला वृक्षकी पूजा का विशेष महत्व है। उन्होंने बताया कि आज के दिन सच्चे मन से ईश्वर से जो भी मांगा जाता है उसकी पूर्ति होती है। उन्होंने बताया कि आंवला के फल को अमृत के समान माना गया है।

इटखोरी से महेश कुमार की रिपोर्ट