October 24, 2020

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सूखा पेड़ सीधा खड़ा रहता है लेकिन हराभरा व् फलों से लदा पेड़ झुक जाता है…साध्वी शैल किशोरी जी


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सूखा पेड़ सीधा खड़ा रहता है लेकिन हराभरा व् फलों से लदा पेड़ झुक जाता है……साध्वी शैल किशोरी जी

भेलसर(अयोध्या)श्रीराम लीला प्रांगण ख्वाजा हाल में हो रही श्री मद भागवत कथा के दूसरे दिन वृन्दावन धाम से आयी परम विदुषी साध्वी शैल किशोरी जी ने उपस्थित नर -नारियो को अमृत मयी कथा का रसास्वादन कराती हुई कहा कि सभी को नारियो का सम्मान करना चाहिये और हर स्त्री को अपनी बहन बेटी के समान ही समझ कर आचरण करना चाहिये।मनुष्य में अच्छे व बुरे की समझ होनी चाहिये और गलत बात को किसी भी दशा में स्वीकार नही करना चाहिये।साध्वी जी ने कहा कि भगवान के 23 अवतार हुए है लेकिन श्रीराम व श्रीकृष्ण जी का जीवन चरित्र अति प्रचलित है।आज लोग भरतीय संस्कृति से भटक रहे है।प्रत्येक माता पिता को अपनी संतानो को प्रणाम करना सिखाना चाहियें। कथा का विस्तार करते हुए साध्वी जी ने कहा कि सूखा पेड़ सीधा खड़ा रहता है लेकिन हरा भरा व फलो से लदा पेड़ हमेशा झुका रहता है इसी प्रकार मूर्ख ब्यक्ति झुकता नही है लेकिन बुध्दिमान ब्यक्ति लचीला होता है।उन्होंने कहा कि अगम्या स्त्री और गाय का बध करने वाले का तथा जिस ब्यक्ति के बगैर जीवन मे एक पल भी जीना नही सीखा हो, उसके बिना तेज नष्ट हो जाता है।इसी प्रकार जब यदुवंशी आपस मे झगड़ा करने लगे द्वारिका समुद्र में डूब गई भगवान एकांत में बैठ चिंतन कर अपने परम धाम को चले गए,विरह में कुंती ने अपने प्राण त्याग दिया,पाण्डव ने अपने पुत्र परीक्षित को राज पाठ देकर अपने धाम को चले गए।साध्वी जी ने कलयुग के आगमन व राजा परीछित के श्रापित होने 7 दिन में मृत्यु की कथा को विस्तार से बताते हुए कहा कि उनकी मृत्यु को कोई रोक नही पाया यहाँ तक कि नारद कश्यप,वशिष्ठ मुनि भी आये लेकिन श्राप का निवारण नही कर पाए।कोफीन पहने दिगम्बर सन्त सुक देव जी राजा परी छित की सभा मे पहुच गए।सभी संतो ने उनका आदर सत्कार किया और सोचा कि अब मृत्यु टल गई लेकिन ऐसा नहीं हुआ,राजा ने उनसे यह नहीं पूछा कि जल्दी मरने वाले कि मृत्यु कैसे रोकी जय,बल्कि यह पूछा कि 7 दिन में मरने वाले का मोक्ष का उपाय क्या है।आगे की कथा को अगले दिन के लिए अग्रसारित कर भव्य आरती के साथ प्रसाद वितरण किया गया।कथा आयोजक श्रींमती यसोदरा देवी,पवन कुमार कसौधन ने सभी का आभार ब्यक्त किया।ब्यवस्था में सतीन्द्र प्रकाश शास्त्री,राजेश वैश्य,राम शंकर कसौधन,हिमांशु कसौधन का सराहनीय योगदान रहा।

अब्दुल जब्बार एड्वोकेट व् डॉ0 मो0 शब्बीर के साथ सतींद्र प्रकाश शास्त्री की रिपोर्ट