October 28, 2020

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नगीनों का महत्व और आधुनिक समय में इसके प्रभाव


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मुकेश सिंह चौधरी (Russia)

नगीनों का महत्व और आधुनिक समय में इसके प्रभाव

नगीनो के बारे में हर कोई जानता है, क्योंकि यह ज्योतिष से जुड़े होने के साथ-साथ फैशन के तौर पर भी पहना जाता है। अक्सर हम देखते हैं कि जब भी जीवन में कोई अकारण समस्या आती है तो ज्योतिषी संबंधित ग्रह से जुड़ा हुआ नगीना पहनने के बारे में राय देते हैं। इसके साथ साथ शुद्धीकरण और पूजा पाठ का भी कहते हैं। आपने क्या कभी सोचा है कि नगीनो की ऊर्जा किस तरह काम करती है? इसके पीछे क्या कारण है और हमारे जीवन पर इसके क्या प्रभाव होते हैं?
मेरे शोध व अनुभव के आधार पर नगीने दवाई के रूप में काम करते है। इनकी अपनी उर्जा होती है, जो धारण(पहनने) करने वाले कि उर्जा से समन्वित हो कर जीवन को प्रभावित करती है । इनकी जानकारी के आभाव में इनका सकारात्मक से कहि ज्यादा नकारात्मक प्रभाव होता है। नगीने दवाइयों की भांति होते है , इन्हे फैशन और शौंक के लिए पहनना हानिकारक होता है। हर नगीना किसी न किसी ग्रह से जुड़ा हुआ होता है और वो उसकी ऊर्जा का प्रबंधन करता है। जिस तरह से मेडिकल स्टोर में हज़ारो तरह की दवाई होती है तो मनचाही दवा हम नहीं लेते , जो रोग है उसी से संबधित दवा ही लेते है और वो भी निश्चित समय के लिए। और ठीक होने के बाद उस दवा को नहीं लेते। उसी तरह से वही नगीना पहनो जिसकी आपको जरुरत हो या जिसकी आपके ऊर्जा स्तर को सतुंलित करने हेतु आवश्यकता हो।
भारत में नगीना पहनना राशि के आधार पर बताया जाता है , न की ऊर्जात्मक स्तर के आधार पर। राशि के आधार पर नगीनो को बताने के बहुत ज्यादा साइड इफ़ेक्ट है। जैसे अगर कुंभ राशि पर शनि की दशा चल रही हो तो वो सभी कुंभ राशि वालो को शनि देव की दशा के उपाय हेतु और इसकी शांति हेतु नीलम नामक नगीना ही बताएंगे, लेकिन ये सही नहीं है , एक ही नाम के व्यक्तियों पे एक जैसी ग्रह दशा नहीं होती क्योकि राशि के साथ-साथ ऊर्जात्मक स्तर, नाम , चेहरे और काम व उद्देश्य आदि पर भी निर्भर करता है की कौनसा नगीना पहनना चाहिए।
केवल राशि को मध्यनज़र रखते हुए नगीने न पहने। जरूरी नहीं की एक ही राशि के व्यक्तियों को एक जैसी ग्रह दशा हो। जैसे एक व्यक्ति को टी.बी. रोग हो और वो व्यक्ति टी.बी. की दवा लेगा तो उसको टी.बी. रोग से मुक्ति मिलेगी लेकिन वही दवा अगर कोई दूसरा स्वस्थ व्यक्ति लेगा तो उसे नुकसान करेगी। अतः नगीना वही पहने जिसकी जरूरत है। नगीने डिश एंटीना की तरह काम करते है जो की संबधित ग्रह की ऊर्जा को कंप्रेस करते है। जैसे घरों में ज्यादातर तू-तू-मै-मैं (आपसी कलह) पूर्णिमा के नज़दीक अधिक होती है क्योकि उस दिन चन्द्र ग्रह से आने वाली ऊर्जा की रेंज काफी तेज होती है जो हमारे सोचने, समझने व निर्णय लेने की क्षमता को प्रभावित करती है, जिसको हमारा दिमाग ऊर्जावान प्रतिरक्षा प्रणाली के संतुलित ना होने के कारण कंप्रेस नहीं कर पता है। जिसके कारण गुस्सा आता है।
ऐसी स्थिति में मोती नामक नगीना धारण करने और सफेद कपड़ा पहने से काफी हद तक शांति रहती है। क्योकि मोती चन्द्र ग्रह की ऊर्जा को कंप्रेस कर संतुलित करता है। लेकिन ये जन्म तारीख के साथ साथ उनको धारण करने के उद्देश्य के आधार पर हो तो काफी प्रभावी होती है। लेकिन किसी भी नगीने को हमेशा के लिए न पहने क्योकि ये उसी तरह होगा जैसे आप किसी मेडिसिन की लत होती है। नगीना 3 साल तक उर्जात्मक प्रभाव रखता है। ऊर्जावान प्रतिरक्षा प्रणाली (जिसके बारे में पेज https://m.facebook.com/uniquerahasyalogy पर जिकर है) के संतुलित होने से वर्तमान के साथ-साथ भविष्य भी अकारण परेशानियों से सुरक्षित रहता है। नगीने का चुनाव जरूरत के हिसाब व उद्देश्य के अनुसार निश्चित समय के लिए करना चाहि।
अगर नगीना सूट नहीं करता है तो व्यक्ति अकारण परेशानियों का सामना करता है। उसका मन चिड़चिड़ा और निर्णय क्षमता प्रभावित होती है। किसी भी नगीने को पहनने से पहले उसका प्रभाव अपनी उर्जा के साथ जांच कर लेना चाहिए। कई बार देखा जाता है कि अगर कोई व्यक्ति नगीना धारण करता है तो उसके बाद उसे पुरानी यादें आने लगती है और सोच नकारात्मक होने लगती है यह सब नगीने की ऊर्जा का खुद की उर्जा से समन्वित न, होने पर होता है यानी कि इसका नकारात्मक परिणाम निकलता है।