October 23, 2020

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पड़वा पर अनूठी परंपरा–सैंकड़ों सालों से गोवर्धन पर बच्चों को लेटाने


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पड़वा पर अनूठी परंपरा–सैंकड़ों सालों से गोवर्धन पर बच्चों को लेटाने की परंपरा का निर्वहन कर रहे गवली समाजजन

दिलीप सौराष्ट्रीय शाजापुर
– बीमारियों से बचाव व घर की सुख समृद्धि के लिए होती गोवर्धन पूजा

दिवाली पर्व के अगले दिन पड़वा पर यूं तो हर जगह गोवर्धन पूजा
की जाती है। लेकिन शहर के गवली समाज द्वारा की जाने वाली गोर्वधन पूजा
अपने आप में अनूठी है। गाय के गोबर से पर्वत की आकृति बनाकर उस पर बच्चों
को लेटाया जाता है। बच्चों के स्वस्थ्य रहने घर एवं घर में सुख समृद्धि
की कामना के लिए गवली समाजजनों द्वारा सैंकड़ों वर्ष पुरानी पंरपरा का
निर्वहन किया जा रहा है।

शाजापुर जिला विभिन्न त्योहारों को परंपराओं के साथ हर्षोल्लास के साथ निभाने के
लिए जाना जाता है। दिवाली पर्व के अगले दिन पड़वा को लेकर तो परंपरा काफी
विशेष है। गवली समाजजन पड़वा को धूमधाम से मनाते हैं। समाज की महिलाएं
पड़वा के दिन सुबह एक जगह एकत्रित होकर गाय के गोबर से गोर्वधन पर्वत की
अनुकृति बनाती है। जिसके बाद हर घर से खीर-पूरी और मिठाई भोग लगाने के
लिए लाई जाती है। इस दौरान खास तौर पर हर घर से एक कुल्हड़ में गाय का
दूध भी लाया जाता है। इसके पीछे मान्यता है कि यह दूध पीने से वर्ष भर
व्यक्ति निरोगी रहता है। सामुहिक पूजा के बाद समाज के पुरूष हाथोंं में
धानी और बताशे लेकर गोवर्धन पर्वत की सात परिक्रमा लगाते हैं। जिसके बाद
बच्चों को गोर्वधन पर्वत पर लेटाने की अनूठी परंपरा निभाई जाती है।
जिसमें एक दिन के बच्चे से लेकर युवाओं तक को गोबर से बने गोर्वधन पर्वत
पर लेटाया जाता है। जिसके पीछे गवली समाज की मान्यता है कि इससे बच्चों
को किसी तरह की बीमारी नहीं होती। समाज के आत्माराम गवली, पूनमचंद गवली,
हीरालाल गवली, प्रहलाद गवली, धनराज गवली बताते हैं कि परंपरा समाज में
सैंकड़ों वर्षों से प्रचलित है। गोवर्धन पर्वत का बचा हुआ गोबर देव उठनी
एकादशी पर समाजजन अपने-अपने घर ले जाते हैं। जिसे रसोई घर और पूजा घर में
लिपा जाता है। ताकि घर में सुख समृद्घि और शांति बनी रहे। खास बात यह है
कि आधुनिकता के बदलते दौर में भी समाजजन अपनी अनूठी परंपरा को बड़े ही
उत्साह और आस्था के साथ निभाते हैं