October 28, 2020

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अमावस्या के दिन पैदा होने वाली कन्याओं के जीवन की जटिल व्यथा


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मुकेश सिंह चौधरी (Russia)
अमावस्या के दिन पैदा होने वाली कन्याओं के जीवन की जटिल व्यथा

            पुरातन काल से ही #ज्योतिषविद्या चली आ रही है और ज्योतिष विद्या एक विज्ञान है। यह अलग बात है कि अब आर्टिफिशियल रेडिएशन के कारण वह उतनी इफेक्टिव नहीं है क्योंकि तकनीकी विकास के अनुसार ज्योतिष के क्षेत्र में विकास नहीं हुआ, जिससे कि 70% ऊर्जाओं का हनन जो आर्टिफिशियल रेडिएशन से होता है उसकी रिकवरी समाधान किया जा सके। 
             आज हम बात करेंगे ज्योतिष के उस हिस्से के बारे में जिसमें अमावस्या के दिन लड़की के पैदा होने को उसके जीवन में आने वाली कठिनाई के तौर पर देखा जाता है।
             अक्सर इस सृष्टि में नारी शक्ति का रूप माना जाता है और यह सही भी है। अमावस्या के दिन चंद्रमा का दिखाई ना देने के कारण उस दिन पैदा होने वाली कन्या के जीवन में कठिनाइयों से जोड़कर इसे देखा जाता है। ज्योतिष के अनुसार- "इस दिन पैदा होने वाली कन्या के जन्म के बाद उस की माता पर कष्ट आता है यानी उस कन्या के जन्म के दौरान या बाद उसकी माता अधिक बीमार हो जाती है या कुछ मामलों में उस कन्या से माँ का साया उठ जाता है और यह सब कठिनाई देखने के बाद अगर मां बच भी जाती है तो वैवाहिक जीवन में दिक्कत आना निश्चित माना जाता है और विधवा होने का डर रहता है इसीलिए अमावस्या के दिन पैदा हुई कन्या के नामकरण से पहले ज्योतिषी कुछ पूजा-पाठ या विशेष हवन वगैरह करने के बाद ही उसका नामकरण करते हैं।"
              इस तरह के  मामले सामने आते हैं क्योंकि माता-पिता अपने बच्चों व उनके भविष्य को लेकर काफी चिंतित रहते हैं। मैंने जब इस विषय पर काम शुरू किया तो पाया कि अधिकतर मामलों में यह ज्योतिषीय गणना सही गई है, जो कन्या अमावस्या के दिन पैदा हुई थी उनके जीवन में पूजा पाठ ज्योतिषीय समाधान के बाद भी इस तरह की दिक्कतें थी।  अगर चाहे तो आप भी अपने चारों ओर जानकारी में या किसी बुजुर्ग से इस बारे में बात कर सकते हैं और यह बात अधिकतर मामलों में सही निकलेगी।
                यूनिवर्सल साइंस के अनुसार मैंने अपने 19 साल के शोध व अनुभव के आधार पर पाया कि #ज्योतिषऊर्जा  या #ग्रहनक्षत्रों  की ऊर्जा सिर्फ 30% काम करता है और 70% उर्जा का हनन इन आर्टिफिशियल रेडिएशन के कारण होता है इसके बारे में एक विशेष आलेख मेरे https://m.facebook.com/uniquerahasyalogy पेज पर लिखा हुआ है। ऊर्जावान प्रतिरक्षा प्रणाली के संतुलित होने से इस तरह की अकारण परेशानी जीवन में नहीं आती। ईश्वर ने नारी  को इस ब्रह्मांड में शक्ति के रूप में प्रस्तुत किया है जिससे उसके मातृत्व, पत्नीत्व इत्यादि का अधिकार उससे कोई नहीं छीन सकता है। विशेष तौर पर अमावस्या को पैदा होने वाली कन्या का नाम उसकी जन्म तारीख की श्रेणी के आधार पर संतुलित होना जरूरी है, क्योंकि ऊर्जावान प्रतिरक्षा प्रणाली के आधार पर नामकरण करते समय काया व #परिवारिकसंबंधों से  संबंधित दो अक्षरों को #हाईलाइट रखा जाता है ठीक वैसे ही जैसे ज्योतिष में नक्षत्र के आधार पर पहला अक्षर दिया जाता है लेकिन #ऊर्जावानप्रतिरक्षाप्रणाली में नाम के हर अक्षर को महत्व दिया जाता है। हर किसी का #नामकरण ऊर्जावान प्रतिरक्षा प्रणाली के आधार पर रखते समय जीवन की तीन मूलभूत चीजों का ध्यान रखा जाता है जिसमें एक #काया दूसरा परिवारिक संबंध तीसरा #संपति जिसमें संपत्ति या जायदाद को रखना इतना जरूरी नहीं है जितना कि काया और परिवारिक संबंधों को। ज्यादातर इन मामलों में हम इतने जागरूक नहीं क्योंकि आजकल हर कोई पश्चिमी सभ्यता को मानने वाला बन रहा है और अपनी सभ्यता व संस्कृति को भूलते जा रहे हैं।  अगर किसी भी तरह की कोई जटिल समस्या आ रही है तो उसके कारण जानने के लिए  अपनी जन्म तारीख नाम व पता लिखकर ऊपर दिए हुए पेज पर संदेश भेज सकते हैं। एक परिवार एक सदस्य अभियान के तहत Ubulletin प्रोग्राम के जरिए आपकी जटिल समस्याओं के कारण निशुल्क बताए जाएंगे।