October 28, 2020

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पोर्न सबसे बड़े खतरे का हार्न


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मुकेश सिंह चौधरी (Russia)

भारतीय संस्कृति और परंपरा को धूमिल करने के लिए पोर्न सबसे बड़े खतरे का हॉर्न है। #पॉर्नकीलत मोबाइल इंटरनेट की तकनीकी क्रांति के कारण भारत में इतनी तेजी से बढ़ रही है कि आने वाले 5 से 7 सालों में कैंसर से भी ज्यादा मरीज पाॅर्न की लत के होंगे। जिससे भारतीय संस्कृति और परंपरा ही नहीं जबकि आने वाली पीढ़ी भी इसकी चपेट में आ जाएगी। पाॅर्न की लत का इलाज ना तो आध्यात्मिक क्षेत्र में है और ना ही साइंस के क्षेत्र में। एक शोध के अनुसार अमेरिका में पॉर्न देखने की लत में कमी आई है क्योंकि वहां काफी समय से यह चल रहा था जिसे लोग ऊब चुके हैं और वापिस अपने रास्ते पर आ चुके हैं जबकि अफ्रीकन देशों में अभी तेजी से पॉर्न देखने का ग्राफ बढ़ता जा रहा है। इसमें पुरुष और महिलाओं के पोर्न देखने का स्तर भी अलग-अलग है जिस तरह से अमेरिका में पुरुषों की वजाय महिलाएं और अधिक देखती है और अफ्रीका में महिलाओं की वजाय पुरुष अधिक पोर्न देखते हैं ठीक इसी तरह भारत में इस समय महिलाओं की बजाय पुरुष पोर्न अधिक देखते हैं। जैसा कि हम देखते हैं हमारे समाज में सेक्स को हमेशा से गुप्त रहस्य ही रखा गया है जबकि तकनीकी मोबाइल इंटरनेट क्रांति के कारण लोगों को पोर्न देखने में अधिक दिलचस्पी बढ़ी है और भारत इस इंडस्ट्री का काफी बड़ा बाजार भी है। मोबाइल चलाने वाले लोगों में से 95% ऐसे हैं जो कभी ना कभी पोर्न वीडियो जरूर देखते हैं। उनमें से 4 से 5 महीने में लगभग 70% लोगों का पॉर्न देखने का समय बढ़ जाता है और अधिकतर इसकी चपेट में आ जाते हैं जो एकांत में समय ढूंढने में रहते हैं और इसे देखते हैं। यहां मैं स्पष्ट कर देना चाहता हूं कि पाॅर्न, वर्चुअल सेक्स और सेक्स की लत एक नहीं जबकि तीनो अलग-अलग है। #पॉर्नकानशा सेक्स व वर्चुअल सेक्स के नशे से अधिक खतरनाक है और तीनों के अलग अलग प्रभाव है। एकदम ही कोई इसका आदी नहीं बनता। पहले व्यक्ति कुछ समय इसे देखता है फिर उसके दिमाग में शांति मिलती है और जिज्ञासा बढ़ती है। जब भी हमें किसी चीज की दिमाग में शांति मिलती है या तृप्ति होती है तो दोबारा से वह भुख अधिक बढ़ती है और समय के अनुसार उस तृप्ति को प्राप्त करने के लिए भुख अधिक बढ़ती रहती है। जिससे तृप्ति का स्तर अधिक हो जाता है जिसके आगे सब फीका लगने लगता है। इस की लत का शिकार इंसान एकांत रहने की कोशिश करता है और अधिकतर समय एकांत में मोबाइल के साथ गुजारता है। उसमें चिड़चिड़ापन व गुस्सा आना एक सामान्य बात होती है समय रहते अगर इस पर गौर नहीं किया जाए तो यह समस्या मानसिक, शारीरिक, आर्थिक और परिवारिक इन चारों क्षेत्रों को तहस-नहस करके रख देती है।
मैंने अपने 19 साल के अनुभव और शोध में यह पाया कि व्यक्ति जब किसी भी चीज की अति करता है तो वह लत में परिवर्तित हो जाती है ठीक इसी तरह पॉर्न वीडियो अधिक देखने पर उसकी आदत लत में परिवर्तित होती है और वह इसका शिकार हो जाता है जिसमें मानसिक तनाव के साथ-साथ कुछ समय बाद उसे शारीरिक कमजोरी, नपुंसकता, सेक्स उदासीनता व अन्य परेशानियां होने लगती है और जिसके चलते उसके कार्य करने के कार्यस्थल में भी उसे परेशानी आती है। जिससे आर्थिक नुकसान होता है और परिवारिक समन्वय में भी दिक्कत आती है जिससे परिवारिक संबंधों में दरार आ जाती है। पोर्न की लत भी कई तरह की होती है जैसे किसी को पोर्न ऑडियो सुनने की आदत, किसी को पोर्न पिक्चर्स देखने की आदत, तो किसी को पोर्न वीडियो देखने की आदत। हमारा इंसानी दिमाग हमेशा उन चीजों की ओर आकर्षित होता है जो पर्दे में होती है इसमें उम्र कोई मायने नहीं रखती अगर आप किसी 60 साल के बुजुर्ग को भी कहोगे कि आप उस कमरे में मत जाना तो वह चोरी से घूम फिर कर उस कमरे में जरूर जाएगा इसमें दोष उस बुजुर्ग का नहीं जबकि हमारे दिमाग की यह एक प्रक्रिया होती है हम जिस रास्ते को रोकते हैं उसी ओर यह जाता है। ठीक इसी तरह पॉर्न की लत लगती है। मेरे पास काफी ऐसे भी क्लाइंट आते हैं जो एक जिम्मेवार परिवारिक सदस्य व अच्छी खासी पोस्ट पर विराजमान हैं उनमें भी इस तरह की लत लगी रहती है और वह अध्यात्म के आधार पर तथा साइक्लोजिकल इलाज के बाद भी इसको छोड़ नहीं पाते। यहां पर मैं आपको मेरे शोध व अनुभव के आधार पर यह बताना चाहता हूं की हमारा दिमाग एक सॉफ्टवेयर की तरह काम करता है जो ऊर्जावान प्रतिरक्षा प्रणाली के संतुलन के आधार पर सोचने, समझने व निर्णय करने की क्षमता रखता है इस प्रणाली के कमजोर होने पर वायरस की तरह हमें कोई ना कोई लत लग जाती है और दिमाग उन नकारात्मक चीजों की ओर आकर्षित होने लगता है जिनसे मानसिक, शारीरिक, आर्थिक व परिवारिक नुकसान हो। अगर आप अपने चारों ओर नजर घुमा कर देखेंगे तो पाएंगे कि जिन लोगों का नाम और सरनेम एक ही अक्षर से शुरू होता है उनमें इस तरह की लत नहीं होती या जिन लोगों का नाम जन्म तारीख के अनुसार protected progressive ya Ultra section में संतुलित होता है वह इस तरह की लत के आदी नहीं होते। इंसानी दिमाग का एक नियम होता है कि आप जिस चीज को छोड़ना चाहते हैं वह उसकी ओर अधिक आकर्षित होता है इसीलिए यूनिवर्सल साइंस के अनुसार #ऊर्जावानप्रतिरक्षाप्रणाली के संतुलित होने पर व्यक्ति इस तरह की लत का शिकार नहीं होता क्योंकि इसके संतुलित होने से उसके सोचने, समझने व निर्णय लेने की क्षमता के साथ साथ उसका फ्रेंड सर्कल अच्छा रहता है। मैंने अभी #एकपरिवारएकसदस्यअभियान चलाया है जिसके माध्यम से हर परिवार के एक सदस्य को जोड़ने की मुहिम शुरू की है। यह सब आपकी वजह से ही मुझे प्रेरणा मिली है। अपनी भारतीय परंपरा और संस्कृति को इस तकनीकी युग में बचाना अपने आप में एक चैलेंज है जिसमें हम सबको मिलकर अपनी अपनी भूमिका निभाना होगा। जिससे हम ज्यादा से ज्यादा लोगों को अपनी संस्कृति व परंपरा के प्रति जागरूक रखते हुए अकारण समस्याओं का कारण जानने में लोगों की मदद कर सकें।