November 1, 2020

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अपनों की लाशों पर, वार्ताओं का दौर नही

पुलवामा में ढेर लगा,  शहीदी कंकालों का,रक्त रंजित रंग हो गया, नदियों और नालों का।...
पुलवामा में ढेर लगा,  शहीदी कंकालों का,
रक्त रंजित रंग हो गया, नदियों और नालों का।

शांति की बलिवेदी पर, निर्मम हत्याएं और नही,
अपनों की लाशों पर, वार्ताओं का दौर नही।

घात लगाकर वार ये करते, धोखा इनकी फितरत में,
दोस्त बनाकर छुरा घोपना, शामिल इनकी नियत में,
प्यार दोस्ती की बातों के, ये तो हैं हकदार नही,
लाश खोजते गिद्ध है ये, शांति के किरदार नही।

इनको अब समझाना होगा, बारूदों की भाषा से,
रणचंडी निहार रही है, रण की अभिलाषा से,
भस्मासुर को भस्म करें, और रक्तबीज सँहारे हम,
चालीस के बदले चार सौ, पाकिस्तानी मारे हम।

वीरों का धर्म नही होता, कायर की तरह मर जाना,
क्या जुमला था केवल, एक के बदले दस सर लाना,
राजनीति की बलिवेदी चढ़ना, फौजी को मंजूर नही,
एक बार तुम हाथ तो खोलो, रावल पिंडी दूर नही।

विजय पताका लहरानी है, पाकिस्तानी सीने पर,
बात वीर बनकर रह जाये, धिक्कार हमारे जीने पर,
आतंकी कायर सेना का, नामो निशान नही होगा,
एक बार आदेश करो, अब पाकिस्तान नही होगा।

आतंकी रुण्डों मुंडों से, फुटबाल खेलनी ही होगी,
नरभक्षी के सीने में, तलवार पेलनी ही होगी,
मौत के सौदागर को अब, मौत का डर दिखलाना है,
रूहें उनकी कांप उठे, अब वो तांडव मचाना है।