October 24, 2020

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फिर इकतालीस मारे गए, आतंक की आंधी में

वन्दे मातरम दोस्तों, ***फिर इकतालीस मारे गये, आतंक की आंधी में,ना जाने क्या ढूंढते हम,...
वन्दे मातरम दोस्तों,

***फिर इकतालीस मारे गये, आतंक की आंधी में,
ना जाने क्या ढूंढते हम, अहिंसा में गाँधी में.***

बहुत समय नही गुजरा है उरी के आतंकी नर संहार को, सरकार ने सर्जिकल स्ट्राइक भी की, विपक्ष ने उसके तमाम सुबूत भी मांग लिए।
उसके बाद भी रोजाना आतंकी हमले ही रहे हैं, मगर हमारी सरकार ने इससे कोई सबक नही लिया, इन आतंकियो की समस्या से निपटने के लिए कोई कारगर उपाय नही किये गये, हमारा ख़ुफ़िया तन्त्र एक बार फिर विफल रहा और इसका अंजाम एक बार फिर इकतालीस जवानो की मौत के रूप में सामने आया।

सरकार क्यों आखिर इन आतंकियों के आगे घुटने टेकने को मजबूर है? क्यों नही हम इन्हें नेस्तानाबूद कर पा रहे हैं? क्यों हमारा खुफिया तन्त्र इनके आगे फेल हो रहा है?

इन आतंकियों की मदद उस जगह रहने वाले लोग आखिर क्यों करते है? क्या उन्हें सरकार में भरोसा नही है? क्या लोग आतंकियो को सरकार से अधिक ताकतवर समझते है? क्या इन आतंकियो का डर कश्मीर वासियों के दिमाग में इस प्रकार बैठ गया है की वो चाह कर भी इन आतंकियों की खिलाफत नही कर सकते है?

या फिर सरकार ही वोट बेंक की राजनीती के चलते इन्हें खत्म करना ही नही चाहती है?

सरकारों को इस बारे में सोचना ही होगा की हमारे वीर जवान आखिर कब तक इस प्रकार सरकारी मंसा के चलते शहीद होते रहेंगे? आखिर कब जागेगी सरकार?

मैंने बहुत बार सोचा है कि युद्ध किसी समस्या का हल नही है, मगर फिर सोचता हूँ अगर बातों से सब ठीक होता तो रावण को मरना नही पड़ता, महाभारत भी नही होता,
नही होता प्रथम और द्वतीय विश्वयुद्ध, हिरोशिमा और नागासाकी नही होता, भारत पाकिस्तान तीन बार आमने सामने नही होते, भारत चीन युद्ध भी नही होता, 26/11 नही होता, सद्दाम को भी मरना नही होता।
इन सबको सोचता हूँ तो लगता है शान्ति की स्थापना के लिए दुष्टों का वध आवश्यक है, और वध के लिए युद्ध जरूरी है। तो फिर रोज सैनिकों के इस तरह कायराना तरीके से मर जाने से बेहतर है रणक्षेत्र में एक बार इन कायरों की छाती चीर कर विजयी हो जाना।

(यहाँ अहिंसा और गाँधी से मेरा तात्पर्य महात्मा गाँधी की उन नीतियों से है जो पूर्णतया अहिंसा में विश्वास रखती हैं, हम अहिंसा अहिंसा चिल्लाते रहते हैं और वो वार पर वार करते रहते हैं।
किसी की भावनाओं को ठेस पहुचाने का मेरा कोई इरादा नही है, अगर किसी को भी मेरे इन वाक्यों से ठेस लगती है तो मैं माफ़ी चाहता हूँ. मगर मुझ सहित तमाम भारतीयों के दिल मे बहुत से सवाल तो है ही)