October 26, 2020

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प्रयागराज :- पूरी अकीदत के साथ मनाया गया इमाम हुसैन का चेहल्लुम


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शाहिद नक़वी*
प्रयागराज। पैग़म्बर मोहम्मद साहब के नवासे हज़रत इमाम हुसैन का चेहल्लुम देश-विदेश की तरह साहित्यिक और सांस्कृतिक शहर प्रयागराज में भी पूरी अकीदत के साथ मनाया गया।कर्बला में इमाम हुसैन ने यजीद आतंकवाद के खिलाफ मानवता की रक्षार्थ अपने परिवार सहित 72 साथियों को कुर्बान कर दिया था। इसीलिए इमाम हुसैन की याद हर धर्म के लोग किसी न किसी रूप में मनाते हैं। दरअसल आतंकवाद से लड़ने की प्रेरणा इमाम हुसैन से ही मिलती है। प्रयागराज में चेहल्लुम पर दो जुलूस शहर के अलग-अलग इलाकों से निकलें। बताया जाता है कि इमामबाड़ा आज़म हुसैन रानी मंडी से निकलने वाला जुलूस सन 1860 में कायम किया गया था। वहीं शहर के दरियाबाद में इमामबाड़ा सलामत अली खां से निकलने वाला शाही चेहल्लुम जुलूस इससे भी पुराना है।

हरजत इमाम हुसैन और कर्बला के 72 शहीदों की याद में चेहल्लुम का जुलूस रविवार को शहर के कदीमी रास्तों से निकला। मर्सियाख्वानी, सीनाजनी, छुरियों का मातम कर हुसैनियों ने पूरे माहौल को गमजदा कर दिया। शहर भर की सड़कों पर या अली…या हुसैन की सदाएं गूंजती रहीं।रानीमंडी से निकलें जुलूस में बुजुर्ग मर्सियाख्वान ज़ायर हुसैन के साथ अन्य लोगों ने मर्सियाख्वानी से माहौल को गमजदा बना दिया। इमामबाड़ा आज़म हुसैन से निकले चेहल्लुम के जुलूस में मौलाना जव्वाद हैदर जूदी ने कर्बला के शहीदों की कुर्बानी का ज़िक्र किया। कदीमी रास्तों से जुलूस रानीमंडी बच्चाजी धर्मशाला तक गया। यहां से मातमी अंजुमनों ने नौहाख्वानी की। अंजुमन हुसैनिया क़दीम, शब्बीरिया, अब्बासिया के सदस्यों ने पुरदर्द नौहों और मातम से हजरत इमाम हुसैन सहित कर्बला के 72 शहीदों को याद किया। कोतवाली और नखास कोहना पर अकीदतमंदों ने धारदार छुरियों व जंजीरों से मातम कर खुद को लहूलुहान कर दिया। अकीदतमंदों ने फूल और सूती चादर चढ़ा कर मन्नतें व मुरादें मांगीं। जुलूस में शबीहे ताबूत हज़रत इमाम हुसैन, ताबूत हज़रत अली अकबर, झूला हज़रत अली असगर, बीमार-ए-कर्बला का बिस्तर, जनाब-ए-जैनब और उम्मे कुलसूम की ऊंटों पर रखी अमारी, जुलजुनाह और अलम की शबीह भी शामिल रही।देश शाम जुलूस चकिया कर्बला पहुंच कर समाप्त हुआ।वहां भी अकीदत मंदो ने मजलिस और नौहाखानी से अपने ग़म का इज़हार किया। चकिया कर्बला में मौलाना रज़ी हैदर ने मजलिस को खिताब किया।इस दौरान पुलिस प्रशासन की चाट चौबंद व्यवस्था रही।

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वहीं दूसरी ओर शहर की वारसी कमेटी की ओर से हजरत इमाम हुसैन की याद में नातख्वानी हुई। इस दौरान इस्लाम जिन्दा होता है हर करबोबला के बाद, हर कौम पुकारती है हमारे हैं हुसैन, आ अली, या हुसैन के नारे हुए।दूसरे धर्म के लोग भी इन कार्यक्रमों में शरीक हुए।