October 28, 2020

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वैवाहिक जीवन के दौरान मैरिटल अफेयर के कारण बिखरते परिवारो का कारण व बचा़व।


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मुकेश सिंह चौधरी (Russia)

वैवाहिक जीवन के दौरान मैरिटल अफेयर के कारण बिखरते परिवारो का कारण व बचा़व
आज की इस भाग दौड़ भरी जिंदगी में अकारण समस्याएं इंसानी जीवन का पीछा नहीं छोड़ रही। जिसमें मोबाइल और इंटरनेट क्रांति ने आग में घी डालने का काम किया है। विवाह हमारे समाज का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है जिसमें हर शख्स अपने परिवार व पीढ़ी को आगे बढ़ाने के लिए शादी करता है। सबकी दिल से यही इच्छा होती है कि उनका परिवारिक जीवन सुख से बीते लेकिन अपने भारतवर्ष में अब साल दर साल तलाक लेने की संख्या बढ़ती जा रही है इसका कारण जानने की कोशिश कोई नहीं करता बस आनन-फानन और गुस्से गुस्से में निर्णय ले लेते हैं लेकिन कुछ समय पश्चात पछतावा ही रह जाता है कि मैंने ऐसा क्यों किया? काश यह ना करते!
क्या कभी सोचा है कि अक्सर ऐसा क्यों होता है की एक हंसता खेलता परिवार गलत संगत यानी शादीशुदा होने के बावजूद मैरिटल अफेयर्स के कारण टूट जाता है? मेरे शोध व अनुभव के आधार पर इसका सबसे बड़ा पहला कारण नाम का जन्म तारीख से सन्तुलित न होने के कारण #ऊर्जावानप्रतिरक्षाप्रणाली असंतुलित होती है जिससे सोचने समझने में निर्णय लेने की क्षमता संतुलित नहीं रहती है। ज्यादातर जिन परिवारों में तलाक या कोर्ट कचहरी में उनका परिवाद होता है उसमें दोनों यानी पति व पत्नी का नाम जन्म तारीख की तुलना में अधिक ऊर्जा का उत्सर्जन करता है जिससे दोनों के बीच गलतफहमियां पैदा हो जाती है इस तरह की समस्याएं ज्यादातर परिवारों में आती है। जहां पर तलाक नहीं होता लेकिन हर रोज घर में कलेश रहता है या दोनों में से एक क्लेश करता है और कोर्ट कचहरी आदि में केस करने की धमकी या केस करता है तो उसमें जो अधिक लड़ाई करता है उसका नाम जन्म तारीख की तुलना में अधिक ऊर्जा का उत्सर्जन करता है व जो उस बात को जैसे कैसे करके सेट करने की कोशिश करता है या सुनता रहता है उसका नाम जन्म तारीख की तुलना में कम ऊर्जा का उत्सर्जन करता है। दूसरा सबसे बड़ा कारण घर के ऊर्जावान प्रतिरक्षा प्रणाली का कमजोर होना होता है यानी जैसे रसोईघर पानी की टंकी सोने का कमरा इत्यादि का वास्तु अनुरूप ने होना जिसके बारे में एक विशेष पोस्ट मैंने इस पेज पर डाल रखी है।
*मैं यहां कुछ ऐसे सामान्य कारण बता रहा जिनसे तलाक और शादीशुदा होने के बावजूद बाहरी सेक्स संबंध होते हैं।

  1. खुलकर बात नहीं करना 2. शुरुआत किसी विषय पर थोड़ी बहुत अनबन होने पर उस पर बात ना करना 3. कुछ ना कुछ छुपाना या छुपाने की कोशिश करना 4. बात बात पर इरिटेट होना और एक दूसरे पर आरोप प्रत्यारोप लगाना 5. आपसी मतभेद होने पर कुछ दिनों तक न बोलना 6. शारीरिक कमजोरी व समस्या को छुपाना 7. सेक्स अज्ञानता 8. मानसिक तृप्ति और अकेलापन दूर करने के लिए किसी और का सहारा देखना 9.अपने जीवनसाथी के बारे में नकारात्मक टिप्पणी करना।
    * आप सभी से निवेदन है कि जो भी आप इस पोस्ट को पढ़ो तो इसे लाइक कर अपने फेसबुक पेज और ग्रुपो में शेयर जरूर करना ताकि अधिक से अधिक लोगों तक अच्छी जानकारी पहुंचे और हंसता खेलता परिवार टूटने से बचें।*
    यह समस्या एक छोटी सी गलती के कारण शुरू होती है जिसमें खुलकर बात नहीं करना। क्योंकि हमारी सोच यह हैं कि हमारे संस्कृति और परंपरा में संबंधो पर खुलकर बात नहीं की जाती है और ज्यादातर महिलाओं को यह डर सताता है कि अगर इस पर खुलकर बात करेंगे तो पता नहीं पतिदेव क्या सोचेंगे। उसके बाद इसी डर के कारण अगर कभी किसी बात को लेकर अनबन होती है तो उसे वही दबाने की कोशिश करते हैं ना कि उसके कारण जानने की कोशिश की जाती या शांत होने पर उस टॉपिक पर दोबारा बात नहीं करते हैं। एक सबसे बड़ी समस्या यह है कि अपने समाज में एक दूसरे से बात छुपाने की आदत है मन में यह डर रहता है कि अगर बता दिया तो पता नहीं क्या सोचेंगे इसी के चलते दोनों में अंदरूनी दरार शुरू हो जाती है। यहां पर एक बात हमेशा ध्यान में रखनी चाहिए की “पत्नी हमेशा वही बात पूछती है जिसका उसे पहले से पता होता है”।
    कुछ परिवारों में देखा गया है कि आपसी अनबन होने पर काफी दिनों तक वह एक दूसरे से बोलते नहीं जिसके कारण अकेलापन महसूस होता है इसी के चलते हुए अपने मिलने वालों को जो उनके खास होते हैं उनके सामने अपने जीवनसाथी की कमियां या बुराई करने लगते हैं जिससे बात घुम फिर कर फिर वही आ जाती है और दोनों के बीच संबंधों में दीवार खड़ी होनी शुरू हो जाती है। ऐसी स्थिति में पुराना रिश्ता (अगर शादी से पहले रह चुका है तो) याद आता है और उसकी प्यारी बाते आग में घी डालने का काम करती है। आज के समय में शादीशुदा लोगों का बाहर सेक्स संबंध बनाने के पीछे अपने जीवन साथी के साथ शारीरिक कमजोरी के कारण संतुष्टि न मिलना भी इसका एक मुख्य कारण बनता जा रहा है। ज्यादातर मामलो में इसका कारण यह नहीं कि उनका जीवनसाथी कमजोर है जबकि सेक्स के प्रति अज्ञानता इसका मुख्य कारण है।
    अखबार, मोबाइल फोन इत्यादि पर इस तरह के विज्ञापन चलते हैं कि लिंग का साइज बढ़ाओ, स्टैमिना बढ़ाओ, संतुष्टि पाओ इत्यादि इत्यादि जिसके चलते मानसिक स्तर पर तृप्ति का स्तर बढ़ जाता है और संतुष्टि ना मिलने पर ऐसे विज्ञापन ही दिमाग में आते हैं जबकि यह विज्ञापन की जानकारियां सत्य नहीं है। “इस तरह से अगर लिंग का साइज बढता तो राजा महाराजा या बड़े पैसे वाले लोग पता नहीं लिंग का साइज व स्टैमिना कितना बढ़ा लेते। इन विज्ञापनों के माध्यम से लिंग का साइज बढ़ना व संतुष्टि मिलना संभव है या नहीं यह तो पता नहीं लेकिन इनसे परिवार जरूर टूट जाते हैं। पुरुष वर्ग में बहुत तेजी से नपुंसकता बढ़ती जा रही है इसका मुख्य कारण कंप्यूटर और मोबाइल फोन है क्योंकि ज्यादातर लोग कंप्यूटर व लैपटॉप को अपने पेट के निचले हिस्से पर रखकर या पैरों पर रखकर काम करते हैं जिससे घातक रेडिएशन का बुरा प्रभाव उनके जननांगों पर पड़ता है और सेक्स क्षमता घट जाती है तथा मोबाइल को पेंट की अगली जेब में रखने से भी यही होता है।
    आधुनिक बनने के चक्कर में पहले संयुक्त परिवारों से एकल परिवार हुए और अब एकल परिवार से एकल जीवन होना शुरू हो गया ह, क्योंकि मोबाइल व इंटरनेट क्रांति के कारण मानव का स्वभाव बदल चुका है। जिससे उसकी तृप्ति का स्तर भी बढ़ चुका है इसको पूरा करने के लिए जाने अनजाने में वह गलत संगत के कारण गलत आदतों में पड़कर अपने परिवार व बच्चों से हाथ धो बैठते हैं और किसी भी गलत संगत व आदत की ओर आकर्षित होने का कारण हमारी ऊर्जावान प्रतिरक्षा प्रणाली का असंतुलित होना होता है वरना कोई नहीं चाहता कि मेरा बसा बसाया छोटा सा परिवार टूट जाए। लेकिन वह विपरीत परिस्थितियां ही ऐसी होती है जिनमें ऊर्जावान प्रतिरक्षा प्रणाली संतुलित न होने के कारण उनको पार नहीं कर पाते।