October 28, 2020

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चलो उठो हिमालय से सुनो आवाज़ आती है


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चलो उठो हिमालय से, सुनो आवाज़ आती है, दामन मेरा घायल है, धधकती मेरी छाती...

चलो उठो हिमालय से, सुनो आवाज़ आती है,
दामन मेरा घायल है, धधकती मेरी छाती है।
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जो उनकी कैद में पहुंचा है, मेरा ये शेर अभिनंदन,
तुम उसको छीन कर लाओ, शहीदों की वो थाती है।
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मेरी ही गोद मे पलकर, तिरंगा जो जलाते है,
उन्हें तुम कफ़न पहनाओ, तिरंगे के जो घाती हैं।
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ये आतंकी और जिहादी जो तुमने पाल रखे है,
वो क्योंकर जिंदा है अब तक, बात मुझको सताती है।
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शहीदों की चिताओं पर जो करते वोट की बातें,
कहीं वो मर नही जाते, लाज उनको ना आती है।
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ये मस्तिष्क खून से मेरा, जिन्होंने रख दिया रँगकर,
ना उनको मार पाए तुम, मुझे हर शब रुलाती है।
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वो भारत की नही जनता, वो भारत की नही होगी,
भारत मुर्दाबाद के नारे, जो भारत मे लगाती है।
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आस्तीनों में पाले साँप, तुमको रातो दिन डसते,
दूध के बदले जहर देंगे, यही तो इनकी जाति है।
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है भारत से अलग होने की, जिनको रातो दिन हसरत,
उन्हें भारत से दौड़ाओ, आतंक के जो साथी है
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