October 31, 2020

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विशेष :- सुहाग और अटूट प्रेम का प्रतीक करवा चौथ


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सुहाग और अटूट प्रेम का प्रतीक करवा चौथ इस बार बेहद खास संयोग में मनाया जाएगा। महिलाएं इस दिन मंगल व रोहिणी नक्षत्र में पति की दीघार्यु की कामना करेंगी। यह संयोग 70 साल बाद आया है। इस साल व्रत की समयाविधि भी करीब 14 घंटे की रहेगी।
करवा चौथ का व्रत इस वर्ष आज है। ज्योतिषाचार्यों के अनुसार 70 साल बाद बन रहा शुभ संयोग सुहागिनों के लिए फलदायी होगा। इस बार रोहिणी नक्षत्र के साथ मंगल का योग बेहद मंगलकारी रहेगा। रोहिणी नक्षत्र और चंद्रमा में रोहिणी के योग से मार्कंडेय और सत्याभामा योग भी इस करवा चौथ बन रहा है। क्योंकि चंद्रमा की 27 पत्नियों में रोहिणी प्रिय पत्नी है। इसलिए यह संयोग करवा चौथ को बेहद खास बना रहा है। इसका सबसे ज्यादा लाभ उन महिलाओं की जिंदगी में आएगा जो पहली बार चौथ का व्रत रखेंगी।

करवा चौथ व्रत कथाः द्रौपदी से लेकर वीरावती तक, ये है करवा चौथ की कहानी

मान्धाता कहने लगे कि, जब अर्जुन इन्द्रकील पर्वत पर तप करने चले गए तो उस समय द्रौपदी का मन उदास हो गया और वह चिंतित रहने लगीं। वह सोचने लगीं अर्जुन ने बड़ा कठिन काम करना प्रारंभ कर दिया है, यह निश्चय है कि मार्ग में विघ्न उत्पन्न करने वाले बहुत से वैरी हैं। द्रौपदी की यह इच्छा थी कि पतिदेव के काम में कोई विघ्न न आवे इसी चिंता में डूबती-उतरती द्रौपदी श्रीकृष्ण भगवान से पूछती हैंः- द्रौपदी बोली, हे जगन्नाथ! आप एक अत्यन्त गोप्त व्रत को बतावें, जिसके करने से सब ओर के विघ्न दुःख टल जाए।

श्रीकृष्ण बोले कि हे, महाभागे! जैसा आपने मुझसे पूछा है, उसी प्रकार पार्वतीजी ने महादेवजी से पूछा था उनके प्रश्न को सुनकर महादेव जी ने कहा कि हे विरारोहे! हे महेश्वरि! तुम सुनो, मैं तुम्हे सब विघ्न हारिणी करक चतुर्थी का व्रत कहता हूं। पार्वती ने पूछा कि हे भगवन्! करक चतुर्थी का महात्म्य और इस व्रत को करने की क्या विधि है? यह व्रत पहले किसने किया था इसको भी कहिए। महादेवजी बोले कि, जहां बहुत से विद्वान रहते है, जिस जगह बहुत सा चांदी सोना एवं रत्नों का भंडार है। जो सुन्दर स्त्री पुरूषों के दर्शन से तीनों भुवनों को वशीभूत कर लेता है, जहां निरंतर वेद ध्वनि होती रहती है ऐसे स्वर्ग से भी रमणीय इन्द्रप्रस्थपुर में वेद शर्मा नामक विद्वान ब्राह्मण निवास करता था। उसकी पत्नी का नाम लीलावती था। वह एक सद्गुणी स्त्री थी।

इस वेदशर्मा से लीलावती के सात परम तेजस्वी पुत्र और एक शुभ गुणों वाली वीरावती नामक कन्या उत्पन्न हुई। फिर वह ब्राह्मण अपनी नीलकमल सदृश नेत्रोंवाली पूर्ण चन्द्रमा के समान मुख वाली उस वीरावती कन्या को विवाह योग्य होने पर शुभ समय में वेद वेदांग (शिक्षा व्याकरणादि) शास्त्रज्ञ उत्तम ब्राह्मण के साथ विवाह करवा दिया। वीरावती ने अपनी भाभियों के साथ गौरी पूजन किया फिर जब कार्तिक कृष्ण चतुर्थी तिथि आई उस समय वीरावती और उसकी भाभी सब मिलकर बड़े प्रेम से संध्या के समय, वट के वृक्ष को लिखकर उसके मूल में महेश्वर, गणेश एवं कार्तिकेय के साथ गौरी को लिखकर गंध, पुष्प और अक्षतों से इस गौरी मंत्र को बोलती हुई पूजने लगीं। शर्वाणी शिवा को नमस्कार है। आप सौभाग्य और अच्छी संतति उन स्त्रियों को दें जो हर की प्यारी और तेरी भक्ति वाली हो। उसके पार्श्व में स्थित महादेव, गणेश और स्वामी कार्तिकेय को धूप, दीप और पुष्य अक्षतों से अलग-अलग पूजन करे।

वीरावती बालिका थी। भूख प्यास से पीड़ित होने की वजह से अचेत होकर भूमि पर गिर पड़ी। उस समय उसके बांधवगण रोने लगे। कोई उसको हवा करने लगा, कोई मुख पर पानी छिड़कनें लगा, उसका भाई कुछ सोच विचारकर एक बड़े भारी पेड़ पर चढ़ गया। बहन के प्रेम में पीड़ित था। उसने हाथ में एक जलती हुई मसाल ले रखी थी। उस जलती मसाल को ही उसनें चांद बताकर दिखा दिया। उसने उसे चांद समझ, दुख छोड़, विधिपूर्वक अर्घ्य देकर भाव के साथ भोजन किया।

इसी दोष से उसका पति मर गया। धर्म दूषित हुआ और पति को मरा देख शिवजी का पूजन किया। फिर उसनें एक साल तक निराहार व्रत किया। उसकी भाभियों ने संवत्सर के बीत जाने पर फिर वही व्रत किया। पहले कहे हुए विधान से शोभन मुखवाली वीरावती ने भी व्रत किया। उस समय कन्याओं से घिरी हुई शची देवी इस व्रत को करने के लिए स्वर्ग लोक से चली आई और वीरावती के भाग्य से उसके पास अपने आप पहुंच गई। शची देवी ने उस मानुषी को देखकर उससे सब बातें पूछी। वीरावती ने नम्रता के साथ सब बातें बता दी। हे देवेश्वरी मैं विवाह के बाद जब अपने पति के घर पहुंची तभी मेरा पति मर गया। ना जानें मुझसे ऐसा कौन सा पाप हो गया है कि यह फल मिल रहा है।

आज मेरे किसी पुण्य का उदय हुआ है, जिससे हे देवेश्वरी! आप यहां पधारी हैं। आपसे यही प्रार्थना है कि, आप मेरे पति को शीघ्र जीवित करनें की कृपा करें। यह सुन इंद्राणी बोली, हे वीरावति! तुमने अपने पिता के घर पर करक चतुर्थी का व्रत किया था। उस दिन वास्तविक चंद्रोदय के हुए बिना ही तुमने अर्घ्य देकर भोजन कर लिया था। इस प्रकार अज्ञान से व्रत भंग करने की वजह से तुम्हारा पति मर गया है। इस कारण आप अपने पति के पुर्नजीवन के लिए विधिपूर्वक उसी करक चतुर्थी का व्रत करिए। मैं उस व्रत के ही पुण्य प्रभाव से तुम्हारे पति को जीवित करुंगी। श्रीकृष्ण चन्द्र बोले कि, हे द्रौपदी ! इन्द्राणी के वचन सुनकर उस वीरावती ने विधिपूर्वक करक चतुर्थी का व्रत किया।

व्रत के पूरा हो जाने पर इन्द्राणी प्रसन्नता प्रकट करती हुईं। वह एक चुल्लु जल लेकर वीरावती के पति के मरण भूमि पर छिड़ककर उसके पति को जीवित कर दिया। वो पति देवताओं के समान हो गया। वीरावती अपने घर पर जाकर अपने पति के साथ क्रीडा करने लगी। धन, धान्य, सुन्दर पुत्र से उसका दांपत्य जीवन आनंदित हो उठा।

इस बार उपवास का समय

इस बार उपवास का समय 13 घंटे 56 मिनट का है। सुबह 6:21 से रात 8:18 तक। इसलिए सरगी सुबह 6:21 से पहले ही खा लें।
 वर्त में पूरे दिन निर्जला व्रत रख कर महिलाएं शाम को चांद को अर्घ्य देकर व्रत को तोड़ती हैं। इस बार लुधियाना में चांद 8:18 पर निकलेगा। व्रत की कहानी सुनने और पूजा का समय शाम 5:50 से 7:06 तक सबसे अच्छा है।

सेहत के लिए जरूरी बातें

करवा चौथ व्रत करने के लिए बहुत उत्साहित हैं? तो व्रत रखने से पहले कुछ जरूरी बातें जान लीजिए। व्रत करते हुए जरूरी है कि आप अपनी सेहत का भी खास ख्याल रखें, ताकी बिना किसी समस्या के इस पर्व का मजा ले सकें –
♦ चांद निकलने पर पूजा समाप्त होने के बाद एक बार में अधि‍क भोजन करने से बचें। घंटों तक खाली पेट रहने के बाद एकदम से पेट भरकर खाने से न केवल पेट दर्द की समस्या हो सकती है, बल्कि पाचन में भी परेशानी हो सकती है।
♦इतने लंबे समय तक खाली पेट रहने के बाद पहले सिर्फ एक गिलास पानी पीना ही बेहतर होगा, ताकि पेट में ठंडक पहुंचे, और बाद में होने वाली पाचन संबंधी समस्याओं से बचा जा सके।
♦आप चाहें तो नींबू पानी, लस्सी, नारियल पानी या फिर मौसंबी का जूस ले सकती हैं। इससे आपको उर्जा महसूस होगी, और यह आपके पाचन तंत्र की कार्यप्रणाली को भी ठीक करने में सहायक होंगे।
♦व्रत के बाद प्रोटीन से भरपूर आहार लेने का प्रयास करें, आपके शरीर में उर्जा की पूर्ति करने में मदद करेगा। इसके लिए आप कुछ समय रूककर, पनीर व्यंजन या अंकुरित आहार ले सकती हैं।
♦दिनभर के उपवास के बाद तेल मसाले वाले भोजन से बचने की कोशि‍श करें। मिठाईयों और तले हुए व्यंजनों से दूरी बनाए रखें, ताकि आपके पाचन तंत्र पर अधि‍क दबाव न पड़े, और स्वास्थ्य भी सही हो।
♦ आप अगर चाहें तो मिले जुले आटे की रोटी बना सकती हैं। सब्जियों में लौकी, गिल्की, कद्दू, टमाटर, भिंडी, दाल व दही जैसे पाचक व हल्की चीजें ले सकते हैं। दिनभर उपवास के बाद आपका पाचनतंत्र इसे आसानी से पचा सकेगा।
♦ आप चाहें तो दही के साथ फलों का इस्तेमाल भी कर सकती हैं। इसके अलावा फ्रूट चाट भी एक बेहतरीन विकल्प है, जो आपका पेट भी भरेगा और शरीर को उर्जा भी देगा।

करवा चौथ पूजा मुहूर्त
 17:50:03 से
18:58:47 तक

जब चंद्र को अर्घ्य दें तो बोलें यह मंत्र


 करकं क्षीरसंपूर्णा तोयपूर्णमयापि वा। ददामि रत्नसंयुक्तं चिरंजीवतु मे पतिः॥
इति मन्त्रेण करकान्प्रदद्याद्विजसत्तमे। सुवासिनीभ्यो दद्याच्च आदद्यात्ताभ्य एववा।।
एवं व्रतंया कुरूते नारी सौभाग्य काम्यया। सौभाग्यं पुत्रपौत्रादि लभते सुस्थिरां श्रियम्।।