October 30, 2020

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जालन्धर:- सिख नौजवान को किरपान डालकर परीक्षा देने से रोका गया


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मामला सिख नौजवान को किरपान डालकर परीक्षा देने से रोके जाने का
संतोषजनक जवाब न दे सकी केजरीवाल सरकार, हाईकोर्ट में सुनवाई 29 नवंबर को होगी
दोषियों को सजा दिला कर रहेंगेः सिरसा

जालंधर,15 अक्तूबर (मनप्रीत सिंह खालसा):- सिख नौजवान को किरपान धारण कर दिल्ली अधीनस्थ सेवा परीक्षा बोर्ड(डी.एस.एस.एस.बी) में नहीं बैठने देने के मामले में हाई कोर्ट द्वारा जवाब तलब की गई केजरीवाल सरकार कोई उचित जवाब नहीं दे सकी।
इस बारे में जानकारी देते हुए दिल्ली गुरुद्वारा कमेटी अध्यक्ष मनजिंदर सिंह सिरसा ने बताया कि इस मामले की सुनवाई आज चीफ जस्टिस डी.एन पटेल व जस्टिस हरी शंकर की दो सदस्यीय बैंच द्वारा की गई। इस दौरान दिल्ली सिख गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी द्वारा पेश हुए वकील ए.पी.एस आहलूवालिया और हरप्रीत सिंह होरा ने हाईकार्ट को बताया कि पिछली सुनवाई के दौरान अदालत ने दिल्ली सरकार को 15 अक्तूबर तक जवाब दायर करने का समय दिया था व केजरीवाल सरकार ने कल इसका जवाब दायर किया है जिसमें कहा है कि परीक्षा में धातु लेकर जाने की आज्ञा नहीं थी। उन्होंने कहा कि हैरानीजनक बात है कि 3 मई 2018 को हाईकार्ट द्वारा सिख विद्यार्थियों को परीक्षा में किरपान डालकर बैठने का आदेश दिया था जबकि दिल्ली सरकार के अपने उपमुख्यमंत्री की भी 16 दिसंबर 2017 की चिठ्ठी मौजूद है जिसमें सिख विद्यार्थियों को किरपान डालकर परीक्षा में बैठने की बात कही गई थी पर दिल्ली सरकार द्वारा जो जवाब आज अदालत में दायर किया गया, उसमें दोनों बातों का ज़िक्र ही नहीं है।
स. सिरसा ने बताया कि माननीय जजों ने दलीलें सुनने के बाद इस मामले की सुनवाई 29 नवंबर तक टाल दी है और इस मानहानि पटिशन को भी पहले दाखिल दोनों केसों से जोड़ दिया है।
उल्लेखनीय है कि मौजूदा मामला दिल्ली गुरुद्वारा कमेटी द्वारा 24 सितंबर को हरमीत सिंह नाम के सिख नौजवान को डी.एस.एस.एस.बी की परीक्षा में नहीं बैठने देने पर केजरीवाल सरकार के खिलाफ मानहानि पटिशन दायर की गई थी क्योंकि हाई कार्ट द्वारा पहले ही सिख परीक्षार्थियों को किरपान पहन कर परीक्षा देने की इजाजत दी जा चुकी है।
स. सिरसा ने कहा कि हैरानीजनक बात है कि दिल्ली हाई कोर्ट के आदेशों के बावजूद परीक्षा कंटरोलर द्वारा यह कहा गया हम किरपान पहन कर परीक्षा में नहीं बैठने देंगे। उन्होंने कहा ऐसा करना हाईकोर्ट के आदेश की अनदेखी है इस मामले में जो भी दोषी है उसे सजा दिला कर रहेंगे।