October 23, 2020

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शिरोमणी,दिल्ली व पटना कमेटी के अध्यक्षों को श्री अकाल तख्त साहिब पर तलब करने की ‘जागो’ पार्टी ने की माँग


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शिरोमणी,दिल्ली व पटना कमेटी के अध्यक्षों को श्री अकाल तख्त साहिब पर तलब करने की ‘जागो’ पार्टी ने की माँग

मर्यादा से अनजान लोग पंथ चला रहें है : जीके

मामला इंडिया गेट समागम में मर्यादा की धज्जियां उड़ने का

नई दिल्ली 15 अक्टूबर (मनप्रीत सिंह खालसा):- इंडिया गेट लाॅन में दिल्ली सिख गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी के द्वारा करवाए गए ‘शब्द अनाहद’ कार्यक्रम में आयोजकों के द्वारा मर्यादा को नजरअंदाज करने पर श्री अकाल तख्त साहिब के जत्थेदार ज्ञानी हरप्रीत सिंह द्वारा दिखाएँ गए सख्त तेवर स्वागत योग्य कदम है। उक्त विचार जागो- जग आसरा गुरु ओट (जत्थेदार संतोख सिंह) पार्टी के अंतरराष्ट्रीय अध्यक्ष मनजीत सिंह जीके ने मीडिया को जारी किए अपने ब्यान में व्यक्त किए है। जीके ने कहा कि शिरोमणी अकाली दल के अध्यक्ष सुखबीर सिंह बादल के लिफाफे से निकलने वाले सियासी नेताओं से ओर क्या अपेक्षा की जा सकती है।शिरोमणी कमेटी अध्यक्ष गोबिंद सिंह लोंगोवाल, दिल्ली कमेटी अध्यक्ष मनजिंदर सिंह सिरसा व महासचिव हरमीत सिंह कालका तथा पटना कमेटी अध्यक्ष अवतार सिंह हित कि पृष्ठभूमि हमेशा पाॅवर पाॅलिटिक्स में विधायक बनने की रही है। इनका मुख्य लक्ष्य धर्म को सीढ़ी बनाकर विधायक का चुनाव जीतने का रहा है।

दिल्ली कमेटी के पूर्व अध्यक्ष जीके ने कहा कि पंथ की प्रतिनिधि 3 मुख्य संस्थाओं के मुखियों को यह मालूम नहीं है कि कीर्तन सुनने की मर्यादा क्या है। कुर्सी पर बैठकर बूट डालकर कीर्तन सुनना इनकी नवाबी सोच तथा धार्मिक परंपराओं के बारे अनपढ़ता की भी पोल खोलता है। साथ ही दिल्ली कमेटी की धर्मप्रचार मुहिम के तहत कार्यक्रमों की रुपरेखा तय करने वाली टीम की योग्यता भी सवालों के घेरे में आ गई है। जीके ने मर्यादा हनन के सभी दोषियों को तुरंत श्री अकाल तख्त साहिब पर तलब करने की जत्थेदार से विनती की।

जीके ने कहा कि गुरु नानक देव जी के 550वें प्रकाश पर्व को समर्पित होकर दिल्ली कमेटी द्वारा अभी तक करवाए गए सभी कार्यक्रमों में श्री गुरु ग्रंथ साहिब से दूरी बनाकर कमेटी ने अपनी लियाकत, एजेंडे व नाकामी की पोल खोल दी है। इसलिए मुझे लगता है कि ‘शब्द गुरु’ से दूरी बनाना कमेटी को भारी पड़ा तथा 13 अक्टूबर को ननकाना साहिब जाने वाले प्रस्तावित नगर कीर्तन की मंजूरी, गुरु मर्जी से ही खटाई में पड़ी थी, जबकि नगर कीर्तन में गुरु साहिब का प्रकाश होना था।

जीके ने तीनों कमेटीयों के अध्यक्षों को अपने साथियों सहित खुद श्री अकाल तख्त पर पेश होकर उक्त मर्यादा उल्लंघन की माफी माँगने की नसीहत दी। क्योंकि इस कार्यक्रम में कीर्तन श्रवण के दौरान कुर्सी पर बूट डालकर बैठना ही केवल एक अपराध नहीं है। बल्कि कीर्तन समागम की संगत को निमंत्रण कार्ड के जरिए कुर्सी वीआईपी तथा वीवीआईपी श्रेणी में दी गई। रागी सिंहों को मजदूरों की तरह 4 घंटे स्टेज पर जबरदस्ती बिठाया गया, ताकि कार्यक्रम की भव्यता बरकरार रहें। नाम कार्यक्रम का ‘शब्द अनाहद’ रखा गया पर शब्द की चोट संगत के हृदय पर मारने की बजाए ‘शब्द गुरु’ से ही पीठ मोड़ ली गई। किसी संगीत अखाड़े या गजल कार्यक्रम की तर्ज पर तड़क- भड़क व डिस्को लाइटों की आड़ में आध्यात्मिक तरंगों को गायब कर दिया गया। सिरसा इस कार्यक्रम के मुख्य सूत्रधार बनकर रागी सिंहों को अभ्यास के दौरान ऐसे निर्देशन देते हुए एक वीडियो में नजर आ रहें थे, जैसे सिरसा ने गुरबाणी संगीत में पीएचडी कर रखी हों।

यहाँ बता दें कि इससे पहले ज्ञानी हरप्रीत सिंह जत्थेदार श्री अकाल तख्त साहिब ने कल पत्रकारों के सामने मर्यादा हनन की बात स्वीकार करते हुए इस मामले पर पाँच सिंह साहिबानों की अगली मीटिंग में विचार करने की बात कही थी।
जत्थेदार ने कहा था कि बूट डालकर कीर्तन सुनना मर्यादा के खिलाफ है। जरूरत पड़ने पर सभी दोषियों को तलब किया जा सकता है, चाहे वो कितने भी बड़े पद पर क्यों न हो।