October 20, 2020

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सच सड़क से संसद तक

नही बनपायी मजदूर और प्रबंधन में सहमति


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  1.  ग्रेसिम मजदूरों की हड़ताल का समाधान तलाशने सहायक श्रमायुक्त श्रीमती मेघना भट्ट का शुक्रवार को नागदा आगमन हुआ। तकरीबन 6 घंटे तक सहायक श्रमायुक्त ने हड़ताल की बारीकियों को समझा। यहां तक जिला प्रशासन भी दिनभर इस हड़ताल के हर पहलु से जुड़ा रहा। मेघना भट्ट के साथ एडीएम उज्जैन डा. आरपी तिवारी, एएसपी अंतरसिंह कलेश, एसडीएम नागदा आरपी वर्मा व सीएसपी मनोज रत्नाकर ने भी हड़ताल का निराकरण करने के लिए हरसंभव प्रयास किया। एक पत्रकार के किरदार में मैंने इन अधिकारियों के संग लगभग 6 घंटे व्यतीत किए। सबसे पहले सहायक श्रमायुक्त सर्किट हाउस पर दोपहर में लगभग 12 बजे पहुंची। स्थानीय प्रशासनिक अधिकारियों के संग एक बैठक के बाद वे मीडिया से मुखातिब हुई। प्रेस ने कई सवाल किए। निष्कर्ष यह रहा कि सहायक श्रमायुक्त का कहना थाकि ग्रेसिम गेट पर जो भी घटना हुई वह ठीक नहीें । एक सवाल के जवाब पर वे बोली, ग्रेसिम मजदूरों का समझौता एक कानूनी प्रकिया के तहत श्रमसंगठनों के साथ हुआ। इसलिए इसको निरस्त नहीं किया जा सकता। लेकिन इसको कानूनी प्रकिया के तहत चूनौती दी जा सकती है। श्रमसंगठनों की भूमिका को लेकर कई सवाल जब पत्रकारों ने किए तो काफ ी आत्मविश्वास के साथ जवाब दिए। कहना था मजदूर ही तो श्रमसंगठन बनाते हैं। फि र उनसे क्यों परहेज।

ग्रेसिम श्रमिक मनोरंजनालय में बैठक
बाद में अधिकारियों का काफि ला ग्रेसिम श्रमिक मनोरंजनालय पहुुंचा। बताया गया यहां पर ठेका श्रमिकों से सीधे चर्चा होगी। यहां पर लगभग एक दर्जन ठेका मजदूर पहुंच थेे। प्रबंधन की और से महाप्रबंधक विनोद कुमार मिश्रा एवं जनसंपर्क अधिकारी संजय व्यास बैठक में जब पहुंचे तो कांग्रेस नेता सुबोध स्वामी ने इनकी उपस्थिति को लेकर यह कड़ी आपति जताई कि इन दोनों अधिकारियों के पास पावर नहीं है। जो भी मांग मजदूरों की आएगी उस पर ये लोग निर्णय लेने में सक्षम नहीं है। आखिकरकार मुद़दा बनाने के बाद उद्योग के वरिष्ठ उपाध्यक्ष व्हायएस रघुवंशी पहुंचे। इस दौरान अनूठा नजारा था कि ठेका श्रमिकों ने सहायक श्रमायुक्त के समक्ष श्रम कानून से सबंधित कई सवाल दागे। ठेका मजदूर रमेश गौतम संभवत पूरी तैयारी के साथ बैठक में पहुंचे थे। कई श्रम कानून की धारा पर मेधना भट़ट से सवाल किए। कई बार इनके सवालों से सहायक श्रमायुक्त गंभीर हुई। आखिकार वे बोलने के लिए विवश हुई कि ऐसा नहीं हो सकता। अब इस मामले में जांच कराएंगे। ठेका मजदूर अशोक मीणा एवं रतनसिंह ने भी कड़वेे मुदुदे उठाए जिनका उद्योग दरकिनार कर रहा था। एडीएम डा. आरपी तिवारी इन सभी मुदों पर खामोश थे लेकिन वे भी कई बार मजदूरों की बातों पर संभवत सोचने के लिए मजबूर हुए होंगे। यह पहला मौका था जब बिना ट्रेड यूनियनों के सहायक श्रमायुक्त ने तीन घंटे तक ठेका मजदूरों के साथ चर्चा की। कई मसलों पर जांच कराने का खुलासा किया।

चार सूत्रीय मांगपत्र पर चर्चा
इस चर्चा में सबसे पहले ठेका मजदूरों ने चार सूत्रीय मांगपत्र सौपा। पहली मांग 20 हजार वेतनवृद्धि दूसरी, वेतनवृद्धि का एरियर अप्रैल की बजाय जनवरी से देने की मांग थी। मजदूरों का वर्गीकरण करने की मांग भी शमिल थी। बाद में यह मांग रखी कि प्रतिदिन 100 रूपए की वेतनवृद्धि की जाए।

इस दरमियान ठेका मजदूरों के कार्ड का अवलोकन भी सहायक श्रमायुक्त ने किया। कई बार इन कार्डो पर मजदूरों के पद आदि को लेकर आश्चर्य भी किया। चर्चा में श्री व्हाय, एस रघुवंशी ने यह कहकर ठेका मजदूरों की मांग को मानने से इंकार कर दिया कि यूनियनों के साथ समझौता हो चुका है। अब कुछ भी संभव नहीं। आखिकार ठेका मजदूर बैठक छोडक़र गुस्से के साथ चले गए। इस दौरान प्रेस के लोगों ने भी कुछ सवाल प्रबंधक के समक्ष उठाए। इस दौरान सहायक श्रमायुक्त एक बार फि र ठेका मजदूरों को बुलाकर चर्चा करने की पेशकश की। तब तक ये लोग बैठक छोडक़र जा चुके थे। आखिकार उनको बुलाया गया। काफ ी गहमागहमी, स्नेह आदि के वातावरण में चर्चा आगे बढ़ी। इस दौरान लगा कि मजदूरों की हठ के आगे प्रशासन सोचने के लिए मजबूर हुआ। साथ ही उद्योग प्रबंधक के तेवर भी बदलते दिखे।
मान गया दो मांग मैनेजमेंट
आखिरकार उद्योग के मिश्राजी ने दो मांग मानने की घोषणा मीडिया के समक्ष की। पहली मांग ठेका मजदूरों का वेतनवृद्धि का एरियर जनवरी से देने की लिए प्रबंधक राजी हुआ। साथ ही कार्य के अनुसार ठेका मजदूरों का वगीेकरण पर भी प्रबंधक ने हामी भरी। इधर, ठेका मजदूरों में इस मांग पर असमंजस बना हुआ था। नतीजा कुछ स्पष्ट सामने नहीं आया था।

नागदा से संजय शर्मा