June 6, 2020

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श्रमिको को लेकर तानाबाना शुरू

श्रमिको को लेकर तानाबाना शुरू

देश कोरोना अदृश्य बिमारी जिसका कोई इलाज नही है इस भयंकर संकट से लड़ रहा है और इधर श्रमिको की समस्या दिन ब दिन बढ़ता ही चला जा रहा है।

देश के प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी देश के नागरिकों को संबोधित करते हुए कह रहे है कि देश की जनता आत्मनिर्भर बने इसके लिए प्रधानमंत्री तमाम तरह के प्रयास में लगे हुए है और इधर पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी का कहना है कि भाजपा शाशित राज्यो में श्रमिकों के लिए बना श्रम कानून को निलंबित कर दिया गया है या उन्हें शिथिल कर दिया गया है।

अब सीधे मजदूरों की वर्तमान स्थिति पर गौर किया जाए तो अत्यंत दुखदाई होता जा रहा है सरकार की तमाम ब्यवस्था के बाद भी मजदूर अब कोरोना काल के दौरान अब तक अपनी जीवन लीला को पहले की तरह स्थिर नही कर पा रहे है।

जिन राज्यो से मजदूर अन्य राज्य मजदूरी में गए थे वहाँ से पैदल पलायन या सरकारी ब्यवस्था में पलायन के बाद मजदूरों की हाल भयंकर नाजुक बना हुआ है। संक्रमण के लक्षण नही होने के बाद भी क्वारांटाइन सेंटरो में क्वारांटाइन किया जा रहा है और इधर स्पेसल ट्रेन से सवार आम यात्रियों को उनके घर पर क्वारांटाइन के लिए छोड़ दिया जा रहा है जबकि थर्मल स्क्रीनिंग दोनो ही सूरतो में किया जा रहा है फिर मजदूर और उच्च वर्ग के बीच यह भेदभाव किसलिए किया जा रहा है इसका जवाब तो कोरोना महामारी (कोविद-19) वायरस के स्पेसलिस्ट डॉक्टर ही बता सकते है क्योंकि यह चीनी वायरस लगभग तो मानव शरीर पर एक ही रूपरेखा बनाकर हावी होता होगा फिर मजदूरों को छोड़कर बाकी नागरिको को जो कोरोना संक्रमित राज्य से आ रहे है उनको उनके घर पर क्वारांटाइन की अनुमति देना कही संक्रमण के खतरे की लकीर को न बढ़ा दे।