October 28, 2020

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हर साल क्यों रौद्र रुप दिखाती हैं,नदियां


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प्रयागराज, शाहिद नकवी की रिपोर्ट

प्रयागराज,21 सितम्बर।इलाहाबाद मे जीवनदायिनी गंगा और यमुना पिछले तीन दिनों से कहर बरपा रही हैं।शहरी क्षेत्र के 20 से अधिक मोहल्ले मे कई हजार मकान पूरी तरह डूबे हैं।कल दिन भर पानी की बढ़ने की रफ्तार अधिक थी।यमुना मे प्रति घंटे 2 सेंटीमीटर और गंगा मे भी 1.5 सेंटीमीटर के हिसाब से पानी बढ़ा।आज 21 सितम्बर को भी पानी बढ़ रहा है लेकिन रफ्तार मे कमी आयी है।


एक हजार से अधिक मकानो की एक मंजिल डूब गयी है।इलाहाबाद मे इस साल भी बारिश सामान्य ही रही है।ये बाढ़ शहर के पानी की नही है।ज़ाहिर है कि कहीं ना कहीं मानव निर्मित ही कही जायेगी।बार -बार हम जिस विकास की बात करतें हैं,उस विकास की कीमत भी इस तरह से चुकानी पड़ती है।1978 के बाद शहर मे सन 2013 मे बाढ़ ने तबाही मचाई थी,फिर सन16 मे भी शहर पानी – पानी हो गया था।सन 78 से हर बार यही कहा जाता रहा है कि अब बाढ़ नही आयेगी।ऐसा नही है कि सन 78 के बाद शहर मे बाढ़ नही आयी।आयी लेकिन तबाही का मंज़र बहुत खौफनाक नही था ,इस लिए रिकॉर्ड बुक मे उनका ज़िक्र कम होता है।बहरहाल महज़ 3 साल बाद सन 19 भी  नदियों की उफनती धारा का नया रिकार्ड लिखने जा रही है।अब तक जो अनुमान लगाया जा रहा है उसके मुताबिक पिछला नही सन 19 का रिकॉर्ड याद किया जायेगा।
ये भी काबिलेगौर है कि शहर मे पिछले कई दिनों से बारिश नही हुयी है।फिर सवाल ये है कि आखिर तबाही का पानी कहाँ से आया।जवाब यही है कि इंसान के विकास के नाम सीना तान कर प्रकृति को चुनौती देने वाले विशाल बांध हैं।जिन्हें अरबों रुपये की लागत से ताना जाता है।लेकिन वह ही नही इनको बनाने वाले इंजीनियर भी बेबस नजर आते हैं।बस वह उफनती नदियों के पानी से बांध की दिवारों को बचाने की मिन्नतें किया करते हैं।
इलाहाबाद शहर मे तबाही का पानी मध्यप्रदेश और राजस्थान मे विभिन्न नदियों पर बने बांधों से ही आया है।जिसे जल सग्रहण की तय  सीमा पार करने के बाद यूंही छोड़ दिया जाता है।क्या ये सवाल नही उठता कि जिनके ज्ञान का पैमाना भी बड़ा होता है वह इंजीनियर कैसे ये भांप नही पाते या पीछे के इलाकों से समन्वय नही स्थापित कर पाते कि समय रहते थोड़ा थोड़ा पानी छोड़ा जाता जिससे समस्या विकराल रूप ना धारण कर पाये।बस हम या कोई और बाढ़ पीड़ितों के लिए कुछ नही कर सकते ,कोई मदद उनकी बिगड़ चुकी गृहस्थी को नही सही कर सकती।मिट्टी का तेल,ब्रेड का पैकेट ,लाईचना,पूड़ी सब्जी या कुछ और से फौरी पेट भरता है।बाढ़ का पानी उतरेगा तो फिर ज़िंदगी साफ सफाई से शुरु होगी।

    माना जा रहा है कि फिर बांधों से बड़ी जलराशि नहीं छोड़ी गई तो अगले 24 घंटे में गंगा-यमुना में बढ़ते बाढ़ के खतरे पर लगाम लग सकती है।खबरों के मुताबिक 20 सितंबर को फिलहाल केन बेतवा या फिर चंबल के बांधों से पानी न छोड़े जाने की वजह से थोड़ी राहत महसूस की गई। कुछ जगहों पर यमुना के घटने से ऊपर से प्रवाह कमजोर होने लगा है। देर शाम जलस्तर के ट्रेंड के अनुसार शनिवार तक यहां भी गंगा-यमुना के स्थिर होने का अनुमान है।

           फिलहाल गंगा-यमुना के रौद्र रूप से तटवर्ती इलाकों में बाढ़ का संकट गहराया हुआ है। शुक्रवार को गंगा-यमुना के तटवर्ती चार दर्जन से अधिक नए मुहल्लों में बाढ़ का पानी प्रवेश कर गया। इससे दिन भर गृहस्थी बचाने को लेकर अफरा तफरी मची रही।

शनिवार को सुबह 8 बजे तक प्रयागराज मे नदियों का जल स्तर ,फाफामऊ 85.73 ,छतनाग मे 85.01और नैनी मे यमुना का जल स्तर 85.67 है।