October 20, 2020

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मानसिक अवसाद के लक्षण, कारण, नुकसान व समाधान


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मानसिक अवसाद के लक्षण, कारण, नुकसान व समाधान

वर्तमान भौतिकवादी युग में अधिकतर लोग मानसिक अवसाद के शिकार है। इस बिमारी एक निश्चित स्तर से अधिक होने पर पता चलता है। इसके शुरूआती लक्षण हर कोई समझ नहीं पाता है और इसे हल्के में लेते हैं। शुरूआती लक्षणों में आवाज में भारीपन आना, बात करते समय शब्दों का प्रवाह टुटना, आवाज में बदलाव, घबराहट, चिड़चिड़ापन, मेलमिलाप से दूर रहना, चेहरे पर हल्की झलक आना, ब्लेडप्रेशर कम होना, व्यवहार परिवर्तन, एकान्त में रहने लगना, बिना कन्ट्रोल के शब्दों का निकल जाना इत्यादि।
समान्य तौर पर मानसिक अवसाद किसी आकस्मिक घटना के घटित होने, बहुत सही तरीके व उम्मीद भरे काम का उपयुक्त परिणाम ना मिलना, प्रतिष्ठा पर आघात लगने, #आकस्मिकदुर्घटना या मृत्यु की खबर सुनने आदी से होता है। मेरे अनुसार यह एक मानसिक स्थिति हैं जो उर्जावान प्रतिरक्षा प्रणाली के असंतुलित होने के कारण व्यक्ति विपरीत परिस्थितियों के प्रति अपने आप को संतुलित नहीं रख पाता यानी कि उसे पार करने की पर्याप्त क्षमता नहीं होती विपरीत परिस्थितियों नकारात्मक ऊर्जा होती है और पार करने के लिए उस नकारात्मक उर्जा की तुलना में अधिक सकारात्मक ऊर्जा की आवश्यकता होती है यह ठीक उसी तरह से है जिस तरह सड़क की चढ़ाई में साधन का न काम होना उस सड़क की गलती नहीं जबकि साधन के इंजन की क्षमता उस सड़क की ऊंचाई को पार करने में सक्षम नहीं होती। इस तरह से जीवन वह सड़क है और हमारी ऊर्जावान प्रतिरक्षा प्रणाली उसको पार करने की क्षमता।
जिन लोगों का नाम जन्म तारीख की तुलना में कम ऊर्जा उत्पन्न करता है वह जल्दी मानसिक अवसाद के शिकार होते हैं यानी कि उनमें डर या भय का माहौल जल्दी आता है तथा जिन लोगों का नाम जन्म तारीख की तुलना में अधिक ऊर्जा उत्पन्न करता है वह अपने और कॉन्फिडेंस के कारण बड़ा काम करने की कोशिश करते हैं या अपने आपको ज्यादा समझदार समझने की कोशिश करते हैं और जब वहां से नाकामी का झटका लगता है तो उसे शहर नहीं कर पाते और मानसिक अवसाद का शिकार हो जाते हैं जिससे डिप्रेशन में रहने के कारण शारीरिक कष्ट परिवारिक कलह तथा आर्थिक नुकसान होना शुरू होता है और व्यक्ति अपने स्वयं को इसके लिए जिम्मेदार मानता है जो उसकी सबसे बड़ी गलती है क्योंकि #ऊर्जावानप्रतिरक्षाप्रणाली असंतुलित होने से हमारे सोचने समझने तर्क वितर्क वह निर्णय लेने की क्षमता के आधार पर हम जिस काम का को करना चाहते हैं उसके अनुसार हमारे #न्यूरोमैग्नेटिकसिगनल्स क्रिएट होते हैं और वह कमजोर मैग्नेटिक फील्ड क्रिएट करते हैं उस कमजोर #मैग्नेटिकफील्ड के कारण ही सफलता नहीं मिल पाती और उसे सफलता को सहन न करने का कारण भी ऊर्जावान प्रतिरक्षा प्रणाली का असंतुलित होना होता है जिससे डिप्रेशन यानी #मानसिकअवसाद के शिकार होते हैं।
इस संवेदनशील समय में स्वयं व परिवार को ऐसी अकारण परेशानियों से बाहर रखने के लिए जन्म तारीख की श्रेणी के अनुसार नाम की श्रेणी चुनकर नामकरण करके ऊर्जावान प्रतिरक्षा प्रणाली को सन्तुलित करें। अधिक जानकारी के लिए आप हिन्दी पेज https://m.facebook.com/uniquerahasyalogy पर विजिट करें।