July 3, 2020

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सरकार का फेलियर – ICU में नही हैं बेड खाली, उचित ईलाज के अभाव में मरने के लिए मजबूर है मरीज।

हाई फाई दिल्ली में भी मरीज इलाज के लिए तड़फता और तरसता रहता है, मगर उसे इलाज नही मिलता और डॉक्टर्स कारण बताते है कि मरीज की हालत बहुत खराब है और मरीज को तुरंत ICU की आवश्यकता है मगर हमारे पास ICU में बेड खाली नही है।

बड़ा सवाल ये है कि मरीज की वास्तव में हालत खराब है ये डॉक्टर्स मान रहे है, मगर दिल्ली जैसे बड़े शहर में भी अस्पतालों में ICU में जगह नही है, मरीज अस्पताल डर अस्पताल भटक रहा है, सभी जगह रटा हुआ जबाब ICU में बेड नही है। फिर इसमें मरीज की क्या गलती है। इलाज के अभाव में मरीज को कुछ हो जाता है तो इसका जबाबदेह कौन है, क्या दिल्ली सरकार और अरविन्द केजरीवाल इसके लिए जबाबदेह है, या भारत सरकार और उसके मुखिया नरेंद्र मोदी इसके लिए जबाबदेह हैं।

आखिर राजधानी दिल्ली में चिकित्सा के क्षेत्र में इतनी बड़ी लापरवाही का कारण क्या है, जबकि राज्य और केंद्र सरकार बजट भाषण में चिकित्सा क्षेत्र को बहुत बड़ी राशि देती है। क्या ये पैसा सिर्फ भाषणों में ही रह जाता है, या फिर दलालों और नेताओं की जेबों में आराम फरमाने लगता है। बड़ा सवाल ये भी है कि जब देश की राजधानी में मरीज बिना इलाज के मरने को विवश होता है तो शेष भारत की स्तिथि कितनी खराब होगी।

चलिए अस्पतालों से अलग हटकर जनप्रतिनिधियों की भी बात कर लेते है, प्रधानमंत्री मोदी, गृह मंत्री अमित शाह, दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल, व उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया व स्वास्थ्य मंत्री सत्येन्द्र जैन को अबसे लगभग 5 घण्टे पहले ट्वीट करके बताया जा चुका है कि दिल्ली में ICU में बेड ना होने के चलते एक बुजुर्ग महिला को इलाज नही मिल पा रहा है, मगर किसी भी जनप्रतिनिधी की कोई रिप्लाई नही है। रात 12 बजे से केजरीवाल, सिसोदिया, सत्येंद्र जैन के लगभग 10 नम्बरों पर फोन किया जा रहा है मगर कुछ फोन स्विच ऑफ बता रहे है, कुछ पर घण्टी जा रही है और कोई उठा नही रहा है, अरविंद केजरीवाल के घर वाले लैंडलाइन नम्बर पर एक बार बात भी हुई तो उधर से कहा गया कि आप दिन में बात करना रात को हम उन्हें डिस्टर्ब नही कर सकते हमे ऐसा आदेश है। सिसोदिया के एक लैंडलाइन नम्बर पर बात हुई तो उनका कहना था साहब नववर्ष पार्टी में बिजी है, आप सोनू से बात कर लें और सोनू का नम्बर दे दिया गया, मजेदार बात ये है कि बराबर घण्टी जाने के बाद भी सोनू ने अब तक फोन नही उठाया है। एक बार क्षेत्रीय विधायक इशराक खान (भूरा) से बात रात 1 बजे के लगभग हुई तो उन्होंने कहा मैं अभी स्वास्थ्य मंत्री से बात करके आपको फोन करता हूँ, उसके बाद फोन करने की तो छोड़िए अब तक विधायक साहब का फोन उठा भी नही है।

खैर मुद्दे पर आते है मुद्दा है कि अगर ICU में बेड नही है तो इसमें मरीज की क्या गलती है, मरीज बाहरी भी नही है, पिछले 50 साल से मरीज यही दिल्ली में रह रहा है, बहुत बार उसके वोट से दिल्ली और केंद्र में सरकारें बनी है। उससे सही इलाज का हक क्यों छीना जा रहा है।

बड़ा सवाल ये है कि क्या जनप्रतिनिधी इस महिला के इलाज के लिए अस्पताल पर कोई दबाब डालेंगे जबकि उचित ओर अच्छा इलाज हम सभी का अधिकार है, सरकार हमें खैरात में ये सब नही दे रही है।

नोट – मरीज को 2 घण्टे पटेल चेस्ट में धक्के खिलाने के बाद वहां से राम मनोहर लोहिया अस्पताल रेफर कर दिया गया है जहाँ पिछले 3 घण्टे से मरीज के तीमारदार मरीज को तड़फता देख रहे है क्योंकि ICU में बेड खाली नही है इसलिए मरीज को दाखिल नही किया जा सकता, अब 2 मिनट पहले कुछ कागजों पर हस्ताक्षर करवा कर मरीज को एडमिट कर लिया है, और इन कागजों पर लिखा है कि ICU में उपलब्धता ना होने के कारण यदि मरीज नही रहता है तो उसके लिए अस्पताल प्रसासन जबाबदेह नही है।
इसे कहते हैं डॉक्टर्स की गुंडागर्दी, जानते है मरीज के तीमारदार इस समय साइन करेंगे ही करेंगे चाहे कुछ भी लिख लो बिल्कुल उसी तरह जैसे हम पुरानी फिल्मों में देखते थे कि मजबूरी देखकर साहूकार छोटी सी मदद के बदले सामने वाले के खेत, मकान पुुरी जायदाद नाम करवा लिया करता था।
बीबीसी लाइव न्यूज़ के लिए राकेश गुप्ता की रिपोर्ट